11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में अभी नहीं मिलेगी राहत: हरदीप सिंह पुरी

अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मुकाबले भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की दामों में काफी कम बढ़ोतरी हुई है। दूनिया में पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में 150 से 200 फीसदी की तेजी आई है, जबकि भारत में सिर्फ 70 फीसदी ही दाम बढ़े है। 2030—35 तक दुनिया की पेट्रोल-डीजल की मांग में भारत की हिस्सेदारी 25 फीसदी तक पहुंच जाएगी।

2 min read
Google source verification
पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में अभी नहीं मिलेगी राहत: हरदीप सिंह पुरी

पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में अभी नहीं मिलेगी राहत: हरदीप सिंह पुरी

अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मुकाबले भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की दामों में काफी कम बढ़ोतरी हुई है। दूनिया में पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में 150 से 200 फीसदी की तेजी आई है, जबकि भारत में सिर्फ 70 फीसदी ही दाम बढ़े है। 2030—35 तक दुनिया की पेट्रोल-डीजल की मांग में भारत की हिस्सेदारी 25 फीसदी तक पहुंच जाएगी। यह बात केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तीन दिवसीय पांचवी साउथ एशियन जियोसाइंस कॉन्फ्रेंस जियो इण्डिया 2022 के उद्घाटन सत्र में कही। पुरी ने कहा कि वर्तमान में भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की मांग में वार्षिक 3 फीसदी की तेजी दर्ज की जा रही है। फिलहाल पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में राहत के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में है। भारत को छोड़कर पूरी दुनिया में पेट्रोल डीजल गैस के दामों में भारी वृद्धि हुई है। कुछ देशों में तो यह वृद्धि ढाई सौ पर्सेंट तक की गई है, लेकिन भारत में सिर्फ यह वृद्धि 70% तक ही की गई है। पेट्रोल डीजल और गैस के दाम में फिलहाल कोई राहत नजर नहीं आ रही है, लेकिन जैसे जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार होगा और पेट्रोल डीजल के दामों में तब जाकर कहीं नरमी के संकेत मिल सकते हैं।

यह भी पढ़े: सोयाबीन की फसल बेमौसम बारिश से खराब, खाने के तेल के बढ़ सकते हैं दाम

एसोसिएशन ऑफतेल और गैस की भूमिका पर विचार-मंथन

पेट्रोलियम जियोलॉजिस्ट (एपीजी) की ओर से आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका, नावें और यूरोपीय संघ सहित अन्य देशों के सौ से अधिक विशेषज्ञ मुद्दों पर चर्चा करने और अपने अनुभव साझा करने के लिए भाग लेंगे। ओएनजीसी के सीएमडी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के रूप में जियोइण्डिया कॉन्फ्रेंस का दर्जा बढ़ा है। इस कॉन्फ्रेंस में भारत के अलावा अमेरिका, नॉर्वे, ब्रिटेन समेत अन्य देशों के सौ से अधिक भूविज्ञान और भू-भौतिकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन तेजी से बदलती दुनिया में ऊर्जा संक्रमण के संदर्भ में तेल और गैस की भूमिका पर विचार-मंथन करेंगे। इसलिए, फॉसिल (जीवाश्म ईंधन, डीकार्बनाइजेशन और चेंजिंग एनर्जी डायनेमिक्स को सम्मेलन के लिए एक विषय के रूप में चुना गया है। ओएनजीसी में कार्यकारी एस एन चिटनिस ने बताया कि सम्मेलन में 200 से अधिक तकनीकी पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे, जिसमें 1500 से अधिक भू-वैज्ञानिक और 600 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। तकनीकी पत्रों की प्रस्तुति के अलावा, इस सम्मेलन में वैश्विक विशेषज्ञों द्वारा भविष्य में भारत की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने के लिए एचसी के उत्पादन के साथ-साथ शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूर्ण चर्चा की जाएगी।