
मोहम्मद तस्लीमउद्दीन उस्मानी/ जयपुर . अपने खूबसूरत गीतों से उन्होंने रोमांटिक ऐरा को कई यादगार गाने दिए। उनके लिखे गीतों में रोमांस और जयपुर की मस्ती हमेशा देखने को मिलती। 15 अप्रेल, 1922 को घाटगेट क्षेत्र में जन्मे हसरत जयपुरी जिसे सारे हिंदुस्तान ने गुनगुनाया, उसे राजस्थान ही क्यों खुद उसके शहर के लोगों ने बिसरा दिया।
शायद ही किसी को याद हो कि आज इस रूमानी शायर का जन्मदिन है। अपने सरल और शोख़ गीतों से लाखों करोड़ों की जुबान पर चढ़ जाने वाले इस मकबूल शायर ने अपने शहर के नाम को ही अपनी पहचान बनाए रखा और गुलाबी नगरी का नाम रोशन किया।
डमी धुन पर लिखा 'जिया बेकरार है...'
राजकपूर की फिल्म 'बरसात' के लिए हसरत ने अपना पहला फिल्मी गीत लिखा। संगीतकार शंकर-जयकिशन की जोड़ी की भी यह पहली फिल्म थी। शंकर ने अपने डमी शब्दों पर एक धुन बना रखी थी 'अम्बुआ का पेड़ है, गोरी मुंडेर है, आजा मोरे बालमा, अब काहे की देर है।' इसी धुन पर हसरत ने अपना पहला फिल्मी गाना लिखा 'जिया बेकरार है, छाई बहार है, आजा मोरे बालमा, तेरा इंतज़ार है।' जो उस समय का हिट गीत था।
अपने शहर ने ही बिसराया
उन्होंने ताउम्र गुलाबी नगरी का नाम रोशन किया लेकिन शहरवालों ने ही उन्हें भुला दिया। घाटगेट इलाके में जन्मे इस शायर के नाम से 1999 में उनके निधन के बाद एक रास्ते का नामकरण जरूर हुआ था लेकिन अब उसे बताने वाला ही कोई नहीं मिलता। उनके नाम से शहर में कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं होता। जबकि गुजरात के जामनगर में हर साल इस दिन उनके मुरीद शानदार संगीतमय कार्यक्रम करते हैं। उन्हें 20 साल की उम्र में अपने पड़ोस की एक लड़की राधा से प्यार हो गया। वे उससे अपने प्यार का सीधे इजहार नहीं कर सके, लेकिन कविता 'ये मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर के तुम नाराज ना होना' लिख कर अपनी भावनाओं को कुछ यूं व्यक्त किया।
मुंबई में करते थे दावत
रामगंज के सईद साबरी बताते हैं कि जब भी हम मुंबई में होते थे तो वो अपने घर पर हमारी दावत हमेशा किया करते थे। हमेशा अपने शहर और अपने लोगों से प्यार करते थे उनके बारे में पूछा करते थे।
Published on:
15 Apr 2018 05:37 pm
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