
जयपुर की 75 फीसदी से अधिक आबादी विटामिन डी की कमी से जूझ रही है। देश की एक निजी निदान प्रयोगशाला विटामिन डी की कमी को लेकर सर्वे किया है। इस सर्वे में पाया गया है कि औसतन 76 फीसदी भारतीय विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं। प्रयोगशाला ने भारत के 27 शहरों में किए गए 2.2 लाख से अधिक लोगों के परीक्षण किया। इसके आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 76 प्रतिशत भारतीय आबादी विटामिन डी की कमी से पीडि़त है।
79 फीसदी में कमी
अध्ययन में पाया गया कि कुल मिलाकर 79 प्रतिशत पुरुषों के शरीर में विटामिन डी वांछनीय स्तर से कम पाया गया, महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 75 प्रतिशत था। दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय औसत की तुलना में युवा लोग विटामिन डी की कमी से अधिक प्रभावित पाए गए।
युवाओं में ज्यादा कमी
25 वर्ष से कम आयु वर्ग में सबसे अधिक था, जो लगभग 84 प्रतिशत था। इसके बाद उन 25-40 वर्षों में 81 प्रतिशत था। चेन्नई 81 प्रतिशत के साथ नंबर वन तो जयपुर इस मामले में 10वें स्थान पर रहा।
हड्डियों और मानसिक स्वास्थ्य
विटामिन डी लोगों की वृद्धि, विकास, चयापचय, प्रतिरक्षा, हड्डियों के स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इसकी कमी को प्रोस्टेट कैंसर, अवसाद, मधुमेह, संधिशोथ और रिकेट्स जैसे स्वास्थ्य विकार होने की संभावना बढ़ जाता है।
इनडोर जीवन शैली के कारण दिक्कत
टाटा 1एमजी में मेडिकल अफेयर्स के वीपी डॉ. राजीव शर्मा ने कहा कि खान-पान की बदलती आदतों और इनडोर जीवन शैली के कारण विटामिन डी की कमी के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। युवा वयस्कों में बहुत अधिक प्रसार को फोर्टिफाइड अनाज जैसे विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों के कम उपभोग के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। डॉक्टर मोटापे या हड्डियों के नरम होने के मामलों में या यदि रोगी क्षय रोग का इलाज करवा रहा है, तो नियमित रूप से विटामिन डी के स्तर की जांच करने पर जोर देते हैं।
हर छह माह में विटामिन डी टेस्ट करा लें
टाटा 1एमजी लैब्स के क्लीनिकल हेड डॉ. प्रशांत नाग ने कहा पूर्ण शरीर की नियमित जांच के साथ-साथ विटामिन डी के स्तर की भी जांच की जा सकती है, जिसे हर छह महीने या साल में कम से कम एक बार करने की सलाह दी जाती है।
ये होते हैं संवेदनशील...
शिशु और पांच साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं, किशोरियां और युवा महिलाएं, 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग और सीमित धूप में रहने वाले लोग विटामिन डी की कमी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। सूरज से यूवी-बी विकिरण के संपर्क में आने पर यह विटामिन डी में बदल जाता है। सूरज की रोशनी के पर्याप्त संपर्क में रहने और विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन करने से कमी को रोकने में मदद मिल सकती है।
दो प्रकार का होता है विटामिन डी
विटामिन डी के दो प्रकार का होता है। विटामिन डी2 और विटामिन डी3। विटामिन डी वसा घुलनशील होता है। यह इन दोनों से मिलकर बनता है। विटामिन डी2 और डी3 कई मायनों में एक दूसरे से अलग हैं और दोनों के स्रोत भी अलग हैं।
विटामिन डी3
विटामिन डी3 आपको पशुओं से मिलता है। अंडा, मछली, फिश ऑयल, दूध, दही, मक्खन और दूसरे सप्लीमेंट्स
विटामिन डी2
विटामिन डी2 शरीर को पौधों से मिलता है। मशरूम, ओट्स, बादाम, सोया मिल्क, संतरे का जूस,अनाज और धूप में उगने वाले खाद्य पदार्थों शामिल
Published on:
29 Jan 2023 08:11 pm

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