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बड़े अस्पतालों की इमरजेंसी में रहेगी स्क्रीनिंग टीम, जरूरत के आधार पर छोटे अस्पतालों में भी भेजे जाएंगे मरीज

अस्पताल में अनुपलब्ध महंगी जांचें निजी अनुबंधित लैब और दवाएं जन औषधि केन्द्र से ले सकेंगे मरीज  

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जयपुर

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Vikas Jain

May 12, 2022

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विकास जैन

जयपुर. राज्य के बड़े सरकारी अस्पतालों से मरीजों का दबाव कम करने के लिए इमरजेंसी में डॉक्टरों की स्क्रीनिंग टीम तैनात की जाएगी। यहां मरीज का परीक्षण कर उसकी जरूरत के अनुसार संबंधित अस्पताल में इलाज शुरू किया जाएगा। चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा ने बुधवार को राजस्थान पत्रिका के साथ विशेष साक्षात्कार में कहा कि छोटी बीमारियों के मरीज भी बड़े अस्पताल पहुंचते हैं तो गंभीर मरीजों को परेशान होती है। इसीलिए यह कदम उठाया जा रहा है।

सवाल : बड़े अस्पतालों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है ?
जवाब : पहले नि:शुल्क दवा—जांच और अब संपूर्ण कैशलेस से यह दबाव बढ़ रहा है। चिरंजीवी बीमा योजना भार कम करने में कारगर साबित हो रही है। योजना के तहत निजी अस्पतालों में भी अब नि:शुल्क इलाज उपलब्ध है।

सवाल : छोटी बीमारियों के मरीज भी बड़े अस्पताल जा रहे हैं ?
जवाब : हमने एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को इमरजेंसी के लिए स्क्रीनिंग टीम बनाने के लिए कहा है। वे पूरी तैयारी के साथ यह काम शुरू करेंगे। यह हाइब्रिड मॉडल होगा, जिसमें इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग कर उनकी जरूरत के अनुसार संबंधित अस्पताल में रखा जाएगा।

सवाल : क्या यह हाइब्रिड मॉडल पूरे राज्य में लागू होगा ?
जवाब : बिल्कुल, यह मॉडल धीरे—धीर पूरे राज्य में लागू करेंगे।

सवाल : संपूर्ण कैशलेस के बाद भी मरीजों को जांच व दवा के लिए बाहर जाना पड़ रहा है ?
जवाब : ज्यादातर दवाइयां अस्पताल में ही मिल रही है। हमने महंगी अनुपलब्ध जांचों के लिए निजी केन्द्रों को अनुबंधित कर दिया है। अनुपलब्ध दवा प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र से भी ली जा सकेगी। जिसका भुगतान राज्य सरकार करेगी।

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पत्रिका की मुहिम रंग लाई

राजस्थान पत्रिका बड़े सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ने से मरीजों को हो रही परेशानी का मुदृदा लगातार उजागर कर रहा है। समाचार अभियान में विशेषज्ञों ने हाइब्रिड मॉडल अपनाने और रेफरल का सुझाव दिया था। संपूर्ण कैशलेस इलाज के बावजूद अभी भी कई जांचों व दवाइयों के लिए मरीजों को बाहर भेजे जाने का मामला भी पत्रिका ने प्रमुखता से उजागर किया।