18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बर्खास्त मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर के मामले में आज भी नहीं हुई हाईकोर्ट में सुनवाई

नगर निगम ग्रेटर की बर्खास्त मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर की याचिका पर सोमवार को भी राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल की एकल पीठ में यह मामला सूचीबद्ध था। लेकिन, समय अभाव के चलते नहीं सुना जा सका।

less than 1 minute read
Google source verification
बर्खास्त मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर के मामले में आज भी नहीं हुई हाईकोर्ट में सुनवाई

बर्खास्त मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर के मामले में आज भी नहीं हुई हाईकोर्ट में सुनवाई

जयपुर। नगर निगम ग्रेटर की बर्खास्त मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर की याचिका पर सोमवार को भी राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल की एकल पीठ में यह मामला सूचीबद्ध था। लेकिन, समय अभाव के चलते नहीं सुना जा सका। अब मामले की सुनवाई के लिए 9 नवंबर का समय दिया गया है। सौम्या ने सरकार की ओर से बर्खास्तगी एवं चुनाव पर रोक लगाने को चुनौती दी थी। गौरतलब है कि निगम ग्रेटर के महापौर पद पर 10 नवंबर को मतदान होगा। इसमें भाजपा की ओर से रश्मि सैनी और कांग्रेस की ओर से हेमा सिंघानिया को प्रत्याशी बनाया गया है। इससे पहले भी जयपुर नगर निगम ग्रेटर की पूर्व मेयर सौम्या गुर्जर के मामले में 3 नवंबर को भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। जिस पर अदालत ने अगली सुनवाई के लिए आज का दिन तय किया था।

यह भी पढ़ें: Mayor Soumya Gurjar को बर्खास्त करने की तैयारी में सरकार, तीनों पार्षदों पर भी होगी कार्रवाई

बता दें राज्य सरकार ने सितंबर 2022 में ग्रेटर नगर निगम की महापौर सौम्या गुर्जर को बर्खास्त कर दिया था। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से आदेश जारी किए गए थे। सौम्या को चुनाव लड़ने के लिए 6 साल तक अयोग्य करार भी दिया गया। सौम्या गुर्जर पर तत्कालीन निगम आयुक्त यज्ञमित्र देव के साथ मारपीट करने का आरोप था। सौम्या गुर्जर आरएसएस से जुड़े नेता राजाराम गुर्जर की पत्नी है।

यह था मामला

ग्रेटर नगर निगम के तत्कालीन कमिश्नर यज्ञमित्र सिंह देव के साथ मारपीट व अभद्रता मामले में मेयर सौम्या गुर्जर को बर्खास्त किया गया है। इससे पहले तीन पार्षद अजय सिंह चौहान, शंकर शर्मा व पारस जैन को नगर पालिका अधिनियम सहित अन्य प्रावधानों के अनुसार, दुराचरण, कर्तव्यों के पालन में लापरवाही बरतने व अभद्र भाषा के आरोप में दोषी माना गया था।