
heart problems
चिकित्सकीय जांच व उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) बड़े काम की तकनीक है। महाराष्ट्र के 12 जिलों में एआइ के जरिए हार्ट अटैक के 3,000 मरीजों की जान बचाई गई है। फरवरी, 2021 में इन जिलों में एसटी- एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फारक्शन (स्टेमी) एडवांस डायग्नोसिस प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इसका मकसद हार्ट अटैक के गंभीर मरीजों की जान बचाना है।
एआइ के जरिए हार्ट अटैक की संभावना वाले मरीजों की जांच की जाती है। पुष्टि होने पर मरीजों का गोल्डन ऑवर (4 मिनट) में उपचार किया जाता है। समय पर निदान से मरीजों की जान बच जाती है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला, हार्ट अटैक के गंभीर मरीजों में 70% पुरुष थे।
‘हब एंड स्पोक’ मॉडल अपनाया
स्टेमी के लिए महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग ने ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल अपनाया है। प्रोजेक्ट में शामिल राज्य के 12 जिलों में 145 जगह स्वास्थ्य जांच-उपचार केंद्र स्पोक बनाए गए हैं। इनमें ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला और उप-जिला अस्पताल शामिल हैं। ईसीजी मशीनें (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) उन्नत की गई हैं। सभी स्पोक कैथ लैब सुविधा वाले नजदीकी अस्पतालों के 38 हब्स से जुड़े हैं।
7,377 मरीजों की पहचान
स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के मुताबिक, ईसीजी रिपोर्ट के आधार पर अब तक 7,377 गंभीर मरीजों की पहचान की गई है। इनमें से 2,722 लोगों को गंभीर हार्ट अटैक हुआ था। इन मरीजों को समय पर ऐसी दवाएं दी गईं ताकि धमनियों में रक्त प्रवाह बढ़े। इसके चलते मरीजों के शरीर के अंग बराबर काम करते रहे।
फ्री ईसीजी जांच, रिपोर्ट कंप्यूटर पर अपलोड
सेंटर (स्पोक) पर आए मरीज की मुफ्त ईसीजी जांच की जाती है। जांच की रिपोर्ट कंप्यूटर पर अपलोड कर दी जाती है। स्वास्थ्य सेवा निदेशालय की संयुक्त निदेशक डॉ. पद्मजा जोगेवार ने बताया कि डॉक्टर चार मिनट के भीतर बताते हैं कि मरीज को दिल का दौरा पड़ा है या नहीं। इन केंद्रों पर रेफर किए गए 2.77 लाख मरीजों की अब तक 3.08 लाख ईसीजी जांच की गई है।
Published on:
29 Nov 2022 01:13 pm
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