
Fluoride's bad effect
इन दिनों फ्लोराइड व दूषित तत्वों की मात्रा अधिक आने से पानी शरीर के लिए धीमा जहर साबित हो रहा है। क्योंकि फ्लोराइड के कारण फ्लोरोसिस से ग्रसित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी है। इस पानी का उपयोग करने से चाय-दूध तक फट जाते हैं। बाल्टी या बर्तन में पानी के भरा रहने पर सफेद खार तक जम जाता है, लेकिन जलदाय विभाग की ओर से पानी की शुद्धता के लिए सोलर डी -फ्लोराइड यूनिट लगाने के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
युवा, महिला-बच्चों में बीमारियां
इससे बच्चे, युवा, महिला एवं बुजुर्गों में हड्डियां मुड़कर विकृत होने, दांत पीले, मसूड़े की बीमारी एवं जोड़ों में दर्द होने लगा है। खास बात तो यह है कि पेयजल में फ्लोराइड, नाइट्रेट एवं टीडीएस की मात्रा अधिक होने से लीवर से जुड़ी बीमारियां तक हो रही है।
800 लोग फ्लोरोसिस की चपेट में
चिकित्सा विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक हाल ही में कराए गए सर्वे में तहसील क्षेत्र में करीब 800 लोग फ्लोरोसिस की बीमारी के लक्षण दिखाई दिए हैं। इनमें नंदेरा में 73, गुल्लाना 45, चांदेरा 97, गुढ़लिया 51, पीचूपाड़ा कलां 74, बसवा 48, गुढ़ाकटला 92, श्यामसिंहपुरा 69, प्रतापपुरा 9, रलावता 52, लोटवाड़ा 33, पूंदरपाड़ा 10, आभानेरी 45, भाण्डेड़ा 56 व बडियाल कलां के 46 लोगों के सर्वे में फ्लोरोसिस होना पाया गया है। इसके बावजूद भी प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ऐसे में अब लोग पानी की शुद्धता को लेकर भी जलदाय विभाग को कोसने लगे हैं।
एक दर्जन सैम्पल जीवाणु परीक्षण में फेल
चिकित्सा विभाग की ओर से गत तीन वर्ष में जल स्रोतों में से लिए गए करीब एक दर्जन सैम्पल जीवाणु परीक्षण में असंतोषप्रद पाए गए हैं। इसके अलावा वर्ष 2016 में अभी तक लिए गए 90 नमूनों में से पूंदरपाड़ा के 2 नमूने असंतोषप्रद मिले। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक पानी में 1.5 पीपीएम फ्लोराइड सामान्य रहता है, लेकिन इन दिनों फ्लोराइड की मात्रा 3 पीपीएम से अधिक पहुंच गई है। जबकि नाइट्रेट भी 45 सामान्य रहता है, लेकिन यह भी अब बढकर 140 पीपीएम तक पहुंच गया है। जो कि स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।
मरीजों का उपचार शुरू
ब्लॉक सीएचएचओ डॉ. आर. पी. मीणा ने बताया कि फ्लोरोसिस की रोकथाम के लिए 14 वर्ष तक के बच्चों को कैल्सियम कार्बोनेट 500 एमजी व एसकोरबिक एसिड टेबलेट 500 एमजी आधी टेबलेट 45 दिन तक एवं इससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए 90 दिन तक प्रतिदिन के लिए एक टेबलेट वितरित किया जाना तय है। बीमारी से ग्रसित मरीज दूध, दही, हरी सब्जी एवं इमली का सेवन करें तो काफी हद तक बचाव हो सकता है।
लगाएंगे आरओ यूनिट
जिले में करीब 3 हजार जल स्रोतों के नमूने लिए गए है। इसमें बांदीकुई क्षेत्र के 500 ढाणी व गांवों में पानी की रिपोर्ट में फ्लोराइड व टीडीएस की मात्रा अधिक पाई गई है। इन ढाणियों में से अधिक मात्रा वाली ढाणियों का चयन कर फ्लोराइड यूनिट व आरओ लगाया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।
वेदप्रकाश सैनी, कार्यवाहक सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, बांदीकुई
बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
