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मुश्किल में मुनेश…निलम्बन के बाद अब बर्खास्तगी की लटकी तलवार

-न्यायिक जांच में दोषी पाए जाने पर छह साल तक नहीं लड़ पाएंगी निकाय चुनाव

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मुश्किल में मुनेश...निलम्बन के बाद अब बर्खास्तगी की लटकी तलवार

मुश्किल में मुनेश...निलम्बन के बाद अब बर्खास्तगी की लटकी तलवार

जयपुर. हैरिटेज नगर निगम की निलम्बित महापौर मुनेश गुर्जर की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। न्यायिक जांच में यदि मुनेश को दोषी पाया जाता है तो उनकी बर्खास्तगी तय है। साथ ही वे छह वर्ष के लिए चुनाव नहीं लड़ पाएंगी।

इधर, कार्यवाहक महापौर के लिए दौड़ शुरू हो गई है। किशनपोल विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 64 की पार्षद नसरीन बानो और आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र से वार्ड 79 की पार्षद राबिया गुडएज का नाम सबसे आगे चल रहा है।

न्यायिक जांच के फैसले से पहले चुनाव नहीं

-जानकारों की मानें तो न्यायिक जांच पूरी होने से पहले महापौर पद के लिए चुनाव संभव नहीं है। ऐसे में कार्यवाहक महापौर ही निगम को चलाएंगी।

-माना जा रहा है कि सोमवार को कार्यवाहक महापौर की घोषणा हो सकती है। वैसे तो शनिवार को घोषणा होने की संभावना थी। लेकिन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी के दौरे की वजह से नहीं हो सकी।

पार्षदों का विरोध जारी

55 में से 37 पार्षद मुनेश गुर्जर की खिलाफत कर रहे हैं। एसीबी की कार्रवाई के बाद मुनेश की गिरफ्तारी की मांग मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा से भी कर चुके हैं। इन पार्षदों का कहना है कि मुनेश गुर्जर का सार्वजनिक बहिष्कार जारी रहेगा।

निलम्बन के दौरान पद रिक्त नहीं

महापौर को जिस मामले में पहले निलम्बित किया गया था, उसी में पुन: निलम्बित किया गया है। क्योंकि पूर्व में न्यायालय ने यह माना था कि बिना प्रक्रिया पूर्ण किए निलम्बन किया गया है। अब राज्य सरकार ने प्रकरण न्यायिक जांच के लिए भेज दिया है। न्यायिक जांच प्रभावित न हो, इसको ध्यान में रखते हुए पुन: निलम्बन किया गया है। निलम्बन के दौरान पद रिक्त नहीं माना जा सकता है। इसलिए चुनाव नहीं करवाए जा सकते। राज्य सरकार कार्यवाहक महापौर मनोनीत कर सकती है।

-अशोक सिंह, पूर्व विधि निदेशक, स्वायत्त शासन विभाग