
जयपुर. विश्व विरासत परकोटे में नजूल सम्पत्तियों पर सरकार का ध्यान नहीं है। यही वजह है कि इतिहास को समेटे इन हवेलियों में अवैध कब्जे और निर्माण हो रहे हैं। अवैध निर्माण रोकने के लिए सम्पदा विभाग और हैरिटेज नगर निगम कुछ नहीं कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला रियासतकालीन ओझा जी हवेली का सामने आया है। हवामहल रोड स्थित इस हवेली में पिछले दो वर्ष से निर्माण कार्य चल रहा है। पहले कमरों और दीवारों को ध्वस्त किया गया और अब निर्माण किया जा रहा है, जबकि यह सम्पदा विभाग की नजूल सम्पत्ति की सूची में शामिल है।
राजधानी में 280 नजूल सम्पत्तियां
राजधानी में 280 नजूल सम्पत्तियां हैं। एक अनुमान के मुताबिक इनकी कीमत दो हजार करोड़ रुपए है। ज्यादातर सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे हैं और नगर निगम से मिलीभगत कर नए निर्माण भी कर लिए गए। प्रशासन शहरों के संग अभियान में निगम ने कुछ सम्पत्तियों के तो पट्टे ही जारी कर दिए।
खास-खास
-280 नजूल सम्पत्तियां हैं राजधानी जयपुर में
-121 आवासीय नजूल सम्पत्तियां हैं परकोटे में
नोटिस देकर निगम ने की खानापूर्ति
-मार्च, 2021 में स्थानीय लोगों ने निगम में शिकायत की तो किशनपोल जोन कार्यालय ने नोटिस देकर इतिश्री कर ली।
-निगम अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए नोटिस दिया और उसके बाद हवेली की ओर ध्यान देना बंद कर दिया, जबकि नोटिस में लिखा है कि पुराने कमरे और हैरिटेज हवेली को तोड़ा जा रहा है।
रहने के लिए दी गई थी हवेली
जानकारों की मानें तो वर्ष 1798 में यह हवेली रियासत ने दुर्गाशंकर ओझा को रहने के लिए दी थी। मार्च, 2004 में सम्पदा विभाग ने पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग को पत्र लिखकर बताया कि हवेली सरकारी सम्पत्ति है और इसके दस्तावेज का पंजीयन नहीं किया जाए।
यह है नजूल सम्पत्ति
पूर्व राज परिवारों के यहां काम करने वाले लोगों को रहने के लिए जो संपत्तियां दी गई थीं, उन्हें नजूल संपत्तियां कहा जाता है। बरसों पुरानी इन संपत्तियों पर पूर्व राज परिवार के सेवादारों के परिवार काबिज हैं।
Published on:
22 Aug 2023 12:22 pm
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