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बच्चों के ​लिए हाईकोर्ट ने दिखाई संवेदनशीलता

मजिस्ट्रेटों को संवेनदनशीलता की ट्रेनिंग व बाल कल्याण समितियों पर निगरानी के निर्देश

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने चाइल्ड केयर संस्थानों की दशा सुधारने को फंड आवंटित करने और किशोर न्याय बोर्ड के मजिस्ट्रेटों को संवेदनशीलता की ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा बाल कल्याण समितियों की मॉनिटरिंग की कार्ययोजना बनाने को भी कहा है।
न्यायाधीश संदीप मेहता और न्यायाधीश मनोज कुमार गर्ग की खंडपीठ ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान के आधार पर दर्ज जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने बाल अधिकारता विभाग को किशोर न्याय बोर्ड में तैनात प्रधान मजिस्ट्रेटों को 45 दिन के भीतर संवेदनशीलता का प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि राज्य व जिला मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट के फंड का बच्चों के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि फंड के उपयोग का विभाग प्रस्ताव तैयार करे। सुनवाई के दौरान बाल अधिकार विशेषज्ञ गोविंद बेनीवाल ने बाल कल्याण समितियों के कामकाज की निगरानी के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है। इस पर कोर्ट ने बेनीवाल से कहा कि बाल अधिकारिता सचिव से मुलाकात प्रभावी निगरानी के लिए कार्ययोजना तैयार करवाएं।