
जयपुर. राज्य की सबसे ऊंची इमारत आइपीडी टावर का काम वित्तीय स्वीकृति के कारण अटक गया है। एसएमएस अस्पताल में निर्माणाधीन टावर 24 मंजिल तक बनना है, लेकिन 15वीं मंजिल तक ही स्ट्रक्चर (छत डालने का काम) बन पाया है। आगे की मंजिल निर्माण का काम रुक गया है। जेडीए और चिकित्सा विभाग ने सरकार को 77 करोड़ रुपए का स्वीकृत करने का प्रस्ताव भेजा है लेकिन अभी तक इसकी अनुमति नहीं मिली है। इस वित्तीय स्वीकृति के बाद ही ऊपर की मंजिल का काम शुरू हो पाएगा। तब तक 15 मंजिल तक फिनिशिंग का काम ही हो सकेगा। छत डालने का काम इसके बाद हो सकेगा।
प्रोजेक्ट का काम शुरू हुए एक साल 8 महीने का समय बीत चुका है। इस दौरान प्रोजेक्ट में कई बदलाव किए गए। इसके चलते निर्मित क्षेत्रफल में काफी बढ़ोतरी हो गई है और लागत भी बढ़ गई। लागत बढऩे के कारण प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत राशि 588 करोड़ से बढ़ाकर 665 करोड़ रुपए की गई। नई सरकार की मंजूरी के बाद ही निर्मित एरिया में बढ़ोतरी हो सकेगी। यह प्रोजेक्ट नवंबर-2024 तक पूरा होना है।
प्रदेश में यहां भी अटके प्रोजेक्ट
झुंझुनूं: हर ग्राम पंचायत स्तर पर गोशाला खोलने का प्रोजेक्ट अटक गया है।
धौलपुर: न्यायालय भवन का काम करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से होना है। टेंडर 31 दिसम्बर को खुलने थे।
सीकर: नवलगढ़ पुलिया के फोरलेन होने का काम अटक सकता है। पुलिया के टू-लेन होने से दिनभर जाम लगता है।
अजमेर: कायड़ गांव में मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण कार्य अटका।
(इसी प्रकार श्रीगंगानगर में मिनी सचिवालय और पाली में बांडी नदी पर नए पुल निर्माण अटक गया है। अलवर जिले में 350 करोड़ रुपए की लागत के विकास कार्य अटक गए हैं। भरतपुर में 325 लाख रुपए के कराए जाने वाले सडक़ डामरीकरण एवं नालों का निर्माण अटका गया है। डीग जिले में 6 करोड़ रुपए के काम प्रभावित होंगे)
यह था आदेश
राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी विभागों में नए कार्यों पर रोक लगा दी है। विभाग अपने स्तर पर नए टेंडर जारी नहीं कर सकेंगे। जिन कार्यों की निविदा जारी हो चुकी हैं लेकिन कार्यादेश नहीं दिया गया, ऐसे काम भी शुरू नहीं होंगे। जिन मामलों में कार्यादेश जारी करने के बाद काम शुरू नहीं हुआ है, उनमें भी यह आदेश प्रभावी होगा। जिन कार्यों के लिए प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं, उनकी भी मुख्यमंत्री या मंत्री स्तर पर समीक्षा होगी और उसके बाद आवश्यक होने पर ही प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
काम पूरा हो तो मिलें ये सुविधाएं
एक ही छत के नीचे कई सुविधाएं होंगी। मरीजों के लिए 1243 बेड होंगे
20 ऑपरेशन थिएटर, 4 कैथ लैब, 100 रजिस्ट्रेशन काउंटर
आपात स्थिति के लिए टावर के छत पर हेलीपैड, एयर एम्बुलेंस
विश्वस्तरीय मोर्चरी की सुविधा
100 डीलक्स कमरे, 80 प्रीमियम कमरे (चार सुइट सहित)
200 आइसीयू, न्यूक्लिर मेडिसिन सहित अन्य सुविधाएं
मेडिकल साइंस म्यूजियम, फूड प्लाजा, डायग्नॉस्टिक सुविधा और सेमिनार रूम
Updated on:
24 Dec 2023 01:43 pm
Published on:
24 Dec 2023 01:43 pm
