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हिण्डोली-पेच की बावड़ी बंद रहा

राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर किशोरपुरा टोल गेट पर क्षेत्र के वाहनों को टोल मुक्त करने की मांग को लेकर शनिवार को हिण्डोली व पेचकीबावड़ी कस्बे बंद रहे। इससे पहले संघर्ष समिति के आह्वान पर सुबह से ही दुकानदारों ने बाजार बंद रखे। कुछ दुकानें खुली मिली तो संघर्ष समिति के परमेन्द्र सिंह सोलंकी, प्रदीप जैन, रामचरण कहार, रोहित नामा आदि कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और दुकानदारों से दुकानें बंद करने का आग्रह किया। जिस पर दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दी।

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Shailendra Tiwari

Nov 01, 2015

राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर किशोरपुरा टोल गेट पर क्षेत्र के वाहनों को टोल मुक्त करने की मांग को लेकर शनिवार को हिण्डोली व पेचकीबावड़ी कस्बे बंद रहे। इससे पहले संघर्ष समिति के आह्वान पर सुबह से ही दुकानदारों ने बाजार बंद रखे। कुछ दुकानें खुली मिली तो संघर्ष समिति के परमेन्द्र सिंह सोलंकी, प्रदीप जैन, रामचरण कहार, रोहित नामा आदि कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और दुकानदारों से दुकानें बंद करने का आग्रह किया। जिस पर दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दी।

दुकाने बंद रहने से लोगों को जरूरत के सामान खरीदारी में परेशानी हुई। उधर, पेचकीबावड़ी में सरपंच बाबूलाल मीणा, देवकुमार, बबलू सहित कई लोगों ने बाजार में दुकानें बंद करने का आग्रह किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस जाप्ता तैनात रहा।

टोल गेट पर दिया धरना
टोल गेट पर संघर्ष समिति का धरना शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। इस बीच कई वाहन बीकरण होकर कच्चे रास्ते से होते हुए टोल से दूर निकले। धरने पर बैठे लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी भी की। संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया कि धरना मांग पूरी होने तक जारी रहेगा।

इस संबंध में अधिकारियों से वार्ता भी चल रही है। धरने में पेच की बावड़ी सरपंच बाबूलाल मीणा, परमेन्द्र सिंह सोलंकी, ऋतुराज पारीक, इमरान अली, प्रदीप जैन, रोहित नामा, बबलू सहित कई लोग मौजूद रहे। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार से संघर्ष समिति का धरना जारी है।

जेब हो रही ढीली
लोगों का कहना है कि हिण्डोली मुख्यालय से टोल नाके की करीब पांच किमी है। वहीं पेचकी बावड़ी कस्बे की डेढ़ किलोमीटर दूरी है। दोनों कस्बों के बीच आवागमन बना रहता है, लेकिन टोल वसूलने से लोगों की जेब ढीली हो रही है। जरूरत के सामान लेने के लिए आस-पास के कस्बे में जाना भी महंगा पड़ रहा है। इस मसले को लेकर ग्रामीणों ने पहले भी आंदोलन किया था, तब अधिकारियों ने आश्वासन भी दिया था।