14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

होलाष्टक शुरू, श्रीसूक्त व मंगल ऋणमोचन स्त्रोत का करें पाठ

होलिका अष्टक से पूर्व जिन युवतियों के विवाह के लिए यह होली पहली होगी। उन्हें ससुराल में होली मनाने की बजाय अपने मायके में होली का पर्व मनाना चाहिए।

less than 1 minute read
Google source verification

जयपुर

image

Amit Purohit

Feb 27, 2023

holasthak.jpg

भवानीमंडी/सुनेल(झालावाड़) पत्रिका न्यूज नेटवर्क. होलिका दहन 6 मार्च को है जबकि होली का पर्व 7 को खेला जाएगा। इसके पहले 27 फरवरी से होलाष्टक शुरू हो जाएंगे। इसके चलते शुभ मांगलिक कार्य करना वर्जित के रहता है। इस बार अप्रेल में एक भी विवाह मुहूर्त नहीं है। इस बार होलिका दहन का पर्व 6 मार्च सोमवार को मनेगा तो होली 7 मार्च को खेली जाएगी। इसके साथ ही रंगपंचमी महोत्सव 12 मार्च रविवार को मनेगा। दहन से पहले होलिका अष्टक लग जाएंगे। इस बार अप्रेल में एक भी विवाह मुहूर्त नहीं है।

पंडित प्रफुल्ल जोशी के अनुसार 15 मार्च से एक माह के लिए सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने से खरमास का प्रारंभ हो जाएगा, जो 14 अप्रेल तक रहेगा। इसी के साथ 30 मार्च को देव गुरु बृहस्पति अस्त हो जाएंगे। देव गुरु बृहस्पति का उदय 28 अप्रेल को होगा। लिहाजा अप्रेल में विवाह जैसे मांगलिक कार्य एक तो खरमास और दूसरा देव गुरु बृहस्पति के अस्त होने के कारण नहीं हो सकेंगे। अष्टक में दुल्हन की विदाई और नए घर में प्रवेश को शुभ नहीं मानते हैं। होलिका अष्टक से पूर्व जिन युवतियों के विवाह के लिए यह होली पहली होगी। उन्हें ससुराल में होली मनाने की बजाय अपने मायके में होली का पर्व मनाना चाहिए। ऐसी लोक मान्यता है कि नव विवाहिता को प्रथम बार ससुराल में जलती होली नहीं देखनी चाहिए।

यह करें काम:
अविनाश दीक्षित के अनुसार होलाष्टक में पूजा पाठ और भगवान का स्मरण भजन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। होलाष्टक के दौरान श्रीसूक्त व मंगल ऋणमोचन स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। भगवान नृसिंह और हनुमानजी की पूजा का भी महत्व है। भगवान का नाम जप करने से सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है।