
मेरे ख्वाजा के अंगना में होली है...आओ रे सखी खेलो रे होली...।ÓÓ सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की शान में लिखे गए यह गीत जब गूंजते हैं तो हर कोई एक रंग में रंगा नजर आता है। सदियों से साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल गरीब नवाज की दरगाह में होली के त्योहार पर न केवल हजारों हिन्दू हाजिरी लगाने आते हैं बल्कि दरगाह के सामने फूलों से खेले जाने वाली होली में शामिल भी होते हैं।
ख्वाजा साहब की दरगाह से विश्वभर में भाईचारे का संदेश फैलता है। यही कारण है कि यहां हर धर्म के लोग न केवल खिंचे चले आते हैं, बल्कि मजहब की दूरियां भुला कर कौमी एकता का परिचय देते हैं। यही कारण है कि गरीब नवाज की शान में गूंजने वाली कव्वालियों में न केवल होली का जिक्र किया गया है, बल्कि होली के मौके पर कव्वालियों के कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं।
पिछले दिनों होली पर गुजरात के लोगों ने दरगाह में कव्वालियों का कार्यक्रम भी रखा। खादिम कुतुबुद्दीन सकी की सदारत में हुई महफिल में कव्वालों ने होली के गीत पेश कर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान खेलूंगी होली ख्वाजा घर आए हैं... Ó और तोरा रंग मन भायो मोइनुद्दीन.. Ó जैसे गीत गूंजे। सकी ने बताया कि कई हिन्दू जायरीन जो होली के मौके पर यहां आए हुए होते हैं, वे गरीब नवाज के दरबार में हाजिरी लगा कर ही होली मनाते हैं।
फूलों से खेलते हैं होली
अंजुमन सदस्य सैयद मुनव्वर चिश्ती ने बताया कि दरगाह के निजाम गेट के सामने हर धर्म के लोग मिलजुल कर फूलों से होली खेलते हैं और साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों से फूलों से होली खेलने की यह परम्परा शुरू की गई है। इसमें सामुदायिक सम्पर्क समूह (सीएलजी) सदस्यों के साथ दरगाह बाजार और नला बाजार के व्यापारियों के साथ बाहर से आए जायरीन शामिल होते हैं।
Published on:
22 Mar 2016 11:58 am
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