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सांप देखकर ही लोग घबरा जाते हैं और सांप पकडऩे की बात आए तो कोई हिम्मत नहीं जुटा पाता। लड़कियों के लिए तो ये काम असंभव ही माना जाता है, लेकिन हॉलैंड की लड़कियां इस काम को भी संभव बना रही है। उदयपुर आई हॉलैंड यूनिवर्सिटी की छात्राएं यहां सांप पकडऩे के गुर भी सीख रही हैं।
दरअसल वन्यजीवों से संबंधित अध्ययन के लिए हॉलैंड यूनिवर्सिटी की 20 छात्राओं का दल उदयपुर आया हुआ है। यहां जिले के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करने के साथ ही विशेषज्ञों से मिल रही है। इसी बीच संपर्क में आए वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के चमनसिंह की कला देख प्रभावित हो गई। ग्रुप की कुछ लड़कियों ने सांप पकडऩे में माहिर होने की ठान ली। अब वे शहर और आसपास जहां स्नेक रेस्क्यू के मामले सामने आते हैं, वे वहां टीम के साथ जाकर पूरी प्रक्रिया देखती है। छात्राओं को स्नेक कैचर चमनसिंह प्रशिक्षण दे रहे हैं। गौरतलब है कि चमनसिंह लम्बे समय से उदयपुर व आसपास के क्षेत्रों में सांप व अजगर पकडऩे का काम कर रहे हैं। वे अनुभवी हैं और अब तक लगभग 50 हजार सांपों की जान बचा चुके हैं।
इंटरनेट से पता कर आई उदयपुर
हॉलैंड की छात्राओं ने बताया कि उन्हें स्नैक कैचर्स की तलाश थी तो उन्हें उदयपुर में चमनसिंह के बारे में इंटरनेट के माध्यम से पता चला। यहां के काफी स्नैक रेस्क्यू के मामले भी देखे तब यहां आने का मन बना लिया। वे करीब 22 मई तक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। चमन सिंह ने बताया कि वे उन्हें अब तक अजगर, रेट स्नैक, रेड सैंड बोआ, ट्रिंकेट आदि सांपों को पकडऩे का प्रशिक्षण दे चुके हैं।
छात्राओं ने बताया कि वे सभी एनिमल व वाइल्ड लाइफ लवर्स हैं। ये उनकी शिक्षा का हिस्सा भी है। यहां वे सांप पकडऩे का प्रशिक्षण इसलिए ले रही हैं ताकि हॉलैंड में जाकर वे भी स्नेक रेस्क्यू का काम कर सके। वहां भी सांप खूब निकलते हैं, लेकिन ज्यादातर सांप जहरीले नहीं है, ऐसे में स्नैक कैचर्स भी नहीं है। लड़कियां जब गुर सीखकर जाएंगी तो सांपों को सुरक्षित जंगलों में छोड़ सकेंगी।
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