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मैं मराठी, वो भैया… प्रोफेसर अलोक सिंह की हत्या को लेकर बड़ा दावा, इस नेता ने बताई ‘असल’ वजह

मुंबई के मालाड स्टेशन पर एनएम कॉलेज के प्रोफेसर आलोक सिंह की नृशंस हत्या से सनसनी फैल गई है। 12 घंटे में ही आरोपी ओमकार शिंदे को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन यह वारदात कई सवाल खड़े कर रहा है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 27, 2026

Alok Kumar Singh Murder Mumbai

मृतक आलोक सिंह, उनकी पत्नी पूजा और आरोपी ओमकार शिंदे (Patrika Photo)

मुंबई के मलाड रेलवे स्टेशन पर शनिवार शाम हुई 32 वर्षीय प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह की हत्या ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। लोकल ट्रेन से उतरते समय हुए मामूली विवाद के बाद सिंह के पेट में नुकीली चीज (चिमटी) घोंपकर हत्या कर दी गई। इस मामले में रेलवे पुलिस ने 27 वर्षीय आरोपी ओमकार शिंदे को गिरफ्तार कर लिया है।

अब इस सनसनीखेज हत्या के पीछे की एक अहम वजह सामने आई है। पूर्व शिक्षक विधायक और वरिष्ठ नेता कपिल पाटिल ने फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया कि लोकल ट्रेन में महिलाओं के सामने हुए अपमान ने उसके भीतर गुस्से को भड़का दिया और उसी क्षण उसने यह खौफनाक अपराध कर डाला।

कैसे हुआ विवाद और हत्या?

पुलिस के मुताबिक, मलाड स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर लोकल ट्रेन से उतरते समय प्रतिष्ठित एन.एम. कॉलेज (NM College) के प्रोफेसर आलोक सिंह और ओमकार शिंदे के बीच कहासुनी हुई थी। यह विवाद देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि शिंदे ने अपने पास मौजूद चिमटी से आलोक सिंह के पेट पर वार कर दिया। यह वार इतना गहरा था कि उनकी किडनी के पास गंभीर चोट आई और ज्यादा खून बहने के कारण आलोक की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई।

रेलवे पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए महज 12 घंटे के भीतर आरोपी ओमकार एकनाथ शिंदे को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिंदे की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है। इसी वजह से यह सवाल उठ रहा था कि आखिर वह इतना हिंसक कैसे हो गया।

कपिल पाटिल के अनुसार, "ओमकार शिंदे का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। वह कोई पेशेवर अपराधी नहीं है। दरअसल, ट्रेन में महिलाओं के सामने हुए अपमान ने उसके भीतर के 'पुरुषी अहंकार' और पहले से दबे गुस्से को ज्वालामुखी बना दिया। अपमान का वह क्षण उस पर इतना हावी हुआ कि उसने आलोक सिंह जैसे एक होनहार शिक्षक की जान ले ली।"

पूर्व विधायक ने अपनी पोस्ट में केवल घटना ही नहीं, बल्कि समाज की बढ़ती असहिष्णुता और गुस्से पर भी चिंता जताई है। उन्होंने लिखा कि आज लोग मामूली धक्के या बातों को भी सहन नहीं कर पा रहे हैं। लोकल ट्रेनों की भीड़, लगातार तनाव, सीमित आय, और भाषा, धर्म व प्रांत के नाम पर फैलाया जा रहा जहर लोगों को अंदर से तोड़ रहा है।

उन्होंने कहा, अब लोगों को मामूली धक्का भी बर्दाश्त नहीं होता। लोग एक-दूसरे को शक और नफरत की निगाह से देख रहे हैं। मारने वाला ओमकार दिनभर मेहनत कर मुश्किल से 15-16 हजार कमाता है, जबकि मरने वाले प्रोफेसर आलोक सिंह भी कॉन्ट्रैक्ट पर थे और लगभग 20 हजार महिना कमाते थे। गुस्सा 'सिस्टम' पर निकलना चाहिए था, लेकिन वह एक-दूसरे पर निकल रहा है।

नफरत की राजनीति है वजह...

कपिल पाटिल ने नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि "प्रांत, भाषा और धर्म के नाम पर जो नफरत फैलाई जा रही है, उसने आम आदमी को एक-दूसरे का दुश्मन बना दिया है। मैं मराठी हूं, वो भैया (उत्तर भारतीय) है, मैं हिंदू हूं, वो मुसलमान है, इस मानसिकता ने हमारी सहनशीलता और धैर्य को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।“

उन्होंने पिछले साल नवंबर में हिंदी-मराठी विवाद के चलते जान गंवाने वाले 19 वर्षीय अर्नव खैरे का भी जिक्र करते हुए कहा, यह घटना दो से ढाई महीने पहले की है। ट्रेन में भीड़ के दौरान 19 वर्षीय छात्र अर्नव खैरे ने बस इतना ही कहा था, 'भाई, थोड़ा आगे हो जाओ, धक्का लग रहा है।' केवल हिंदी में बोलने की वजह से कुछ मराठी युवकों ने उसी ट्रेन में उसके साथ मारपीट की। अपमान और डर के गहरे सदमे से टूटकर, मासूम अर्नव ने बाद में अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मुंबई के नामचीन एनएम कॉलेज में गणित पढ़ाने वाले आलोक सिंह जैसे शांत स्वभाव के शिक्षक की हत्या आखिर किस हालात में हो गई। साथ ही उन्होंने आलोक सिंह की गर्भवती पत्नी और उनके परिवार के भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताई है।

कपिल पाटिल ने लिखा कि यह घटना किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की असफलता है। सहनशीलता और सहिष्णुता के अभाव में आम आदमी का गुस्सा दूसरे आम आदमी पर फूट रहा है, जबकि असली जिम्मेदार व्यवस्था है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते समाज ने सब्र और इंसानियत नहीं सीखी, तो ऐसी घटनाएं किसी के भी घर तक पहुंच सकती हैं।

दो परिवार उजड़े

इस घटना ने दो जिंदगियां बर्बाद कर दी हैं। प्रोफेसर आलोक सिंह की पत्नी पूजा सिंह गर्भवती हैं। वारदात के दिन वह घर पर अपने पति का इंतजार कर रहीं थीं, क्योंकि शनिवार को पूजा का जन्मदिन था और दोनों डिनर के लिए जाने वाले थे। इसलिए अलोक एक घंटा पहले ही मलाड स्टेशन पहुंचे थे। अलोक के पिता केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के सुरक्षा टीम में तैनात हैं, इस खबर से वह पूरी तरह टूट चुके हैं।

दूसरी ओर, 27 साल का ओमकार अब सलाखों के पीछे है। वह अपने माता-पिता और एक भाई के साथ मलाड के कुरार गांव में रहता था। उसके पिता को हार्ट की बीमारी है। ओमकार खेतवाड़ी में अपने पिता की धातु पॉलिशिंग यूनिट में काम करता है, साथ ही साथ खुद भी कुछ नकली आभूषण बनाने का काम करता है। उसी में इस्तेमाल होने वाली चिमटी से उसने अलोक पर हमला किया था।