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खलकानी माता के गर्दभ मेले में कद्रदान ज्यादा आने से महंगे बिके घोड़े-घोड़ी

जयपुर के भावगढ़ बंध्या में चल रहे चार दिवसीय श्री खलकाणी माता के गर्दभ मेले में इस बार घोड़े-घोड़ी अच्छी तादाद में पहुंचे। कद्रदान ज्यादा आने से मेले में अच्छी रौनक दिखी।

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जयपुर. राजधानी जयपुर के भावगढ़ बंध्या में चल रहे चार दिवसीय श्री खलकाणी माता के गर्दभ मेले में इस बार घोड़े-घोड़ी अच्छी तादाद में पहुंचे। कद्रदान ज्यादा आने से मेले में अच्छी रौनक दिखी। मन माफिक कीमत मिलने से पशु पालकों के चेहरे खिले हुए नजर आए। इस बार मेले में करीब पांच सौ घोड़े-घोड़ी आए। महाराष्ट्र, उतर प्रदेश से आए खरीदारों ने जमकर खरीदारी की। मेेले में पहले दिन पांच हजार से दो लाख रुपए तक के घोड़े-घोड़ी और बछेरों की अच्छी बिक्री हुई। नायला से आए चंदा मीणा ने बताया कि इस बार मेले में अच्छी नस्लों के घोड़े-घोड़ी आए जिसके कारण मेला थोड़ा महंगा है। केकड़ी से आए छोटूलाल ने बताया कि मेला इस बार महंगा है। उन्होंने एक लाख रुपए की हेमा नामक घोड़ी खरीदी है। उदयपुरिया के रामेश्वर सेवदा मेले में सात घोड़े-घोड़ी लेकर आए है। उसमें एक 11 महीने की रानी 2.5 लाख रुपए में बिकी है। जबकि पायल और कोमल को कोई खरीदार नहीं मिला।
मेले में मारवाड़ी नस्ल का 65 इंची ऊंची कदकाठी का घोड़ा लेकर आए शौकत अली ने बताया कि वे हर साल बादल को मेले में लेकर आते हैं। कई खरीदार आए लेकिन उन्होंने कीमत नहीं बताई। उन्होंने बताया कि बादल लगाम से नहीं आवाज से कंट्रोल होता है।

मेला कई मायनाें में अच्छा
खलखाणी माता मानव सेवा संस्थान के संरक्षक ठा. उम्मेद सिंह राजावत का कहना है कि दूसरे मेलों से यह मेला कई मायनाें में अच्छा है, लेकिन व्यवस्थित नहीं है। सरकार इस पर थोड़ा ध्यान दें तो मेले की रौनक के साथ सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। मेले के संरक्षण के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। आने वाले समय में मेला पुष्कर मेले की तरह अश्च मेले के रूप में ख्याति अर्जित करेगा।

सुरक्षा व्यवस्था में दिखी कमी
मेले में सेवापुरा टोडी से आए मोहन लाल गुर्जर ने बताया कि मेले में सब व्यवस्थाएं ठीक है लेकिन व्यापारियों की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। दो दिन में एक भी पुलिस कर्मी मेले में नहीं दिखा। वहीं मेले में खूंटा पर्ची व रवाना काटने की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे पशुपालकों को परेशानी हो रही है।

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