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Rajasthan Refinery Fire: रिफाइनरी में आग से सीडीयू यूनिट पर मंडराया खतरा, 8,000 करोड़ का हो सकता था नुकसान

Rajasthan Refinery Fire: कंपनी ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, सीडीयू यूनिट तक आग पहुंचती तो हो सकता था , 8,000 करोड़ रुपये का नुकसान
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जयपुर

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Nikhil Parmar

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Updated: 23 Apr 2026, 1:56 PM IST

HPCL Rajasthan Refinery Fire

HPCL रिफाइनरी की सीडीयू यूनिट पर मंडराया आग का खतरा Image Source: पत्रिका फाइल फोटो

Rajasthan Refinery Fire: राजस्थान की सबसे बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचएचआरएल) की रिफाइनरी में लगी आग ने सभी का ध्यान इसकी सबसे महत्वपूर्ण यूनिट क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (सीडीयू ) की ओर खींच दिया है। यह यूनिट पूरी रिफाइनरी का सबसे अहम और महंगा हिस्सा मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार 9 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली इस रिफाइनरी में केवल सीडीयू यूनिट की लागत ही करीब 9,000 करोड़ रुपए तक हो सकती है। वहीं, पूरी रिफाइनरी परियोजना की कुल लागत सरकार ने लगभग 80,000 करोड़ रुपए आंकी है।

आग से हो सकता था, 8,000 करोड़ रुपए का नुकसान

कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि हीट एक्सचेंजर सर्किट में एक वाल्व निकल जाने से हाइड्रोकार्बन गैस का रिसाव हुआ, जिससे आग लग गई। आग रिफाइनरी में एक्सचेंजर स्टैक तक ही सीमित रही। इसके तुरंत बाद सीडीयू और पास की वैक्यूम डिस्टिलेशन यूनिट (वीडीयू ) को अलग कर दिया गया। जिससे सीडीयू यूनिट आग की चपेट में आने से बच गई।

कंपनी अधिकारियों का कहना है कि सभी यूनिट संरचनात्मक रूप से सुरक्षित हैं और रिफाइनरी के किसी अन्य हिस्से को नुकसान नहीं पहुंचा है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आग नियंत्रण से बाहर फैल जाती तो नुकसान 8,000 करोड़ रुपए से भी अधिक हो सकता था। रिफाइनरी सही होने में करीब 4 महीने लग सकते है।

विशेषज्ञों ने बताया कि दुनिया की कई बड़ी रिफाइनरियों में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। मेक्सिको की डॉस बोकास रिफाइनरी और कुवैत की अल-जौर रिफाइनरी में सीडीयू में आग लगने के बाद कई महीनों तक काम प्रभावित रहा था। अब जांच से यह साफ होगा कि बालोतरा की पचपदरा रिफाइनरी कितना नुकसान हुआ है, मरम्मत पर कितना खर्च आएगा और परियोजना की समय-सीमा पर इसका कितना असर पड़ेगा।

क्या होती है सीडीयू यूनिट

सीडीयू रिफाइनिंग प्रक्रिया का पहला चरण होता है। इसी यूनिट में कच्चे तेल को अलग-अलग हिस्सों जैसे नेफ्था, केरोसिन और डीजल में बांटा जाता है। इसके बाद इन्हीं से ईंधन और पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार किए जाते हैं। रिफाइनरी में बनने वाले पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीथीन, बेंजीन और ब्यूटाडीन जैसे उत्पाद परिवहन, प्लास्टिक, दवा और कई अन्य उद्योगों में काम आते हैं।