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Rajasthan District: ऐसे पड़े थे राजस्थान के सभी 41 जिलों के नाम, जानिए नामकरण कहानी

Rajasthan District Names Origin: राजस्थान के सभी जिलों के नामों की उत्पत्ति, इतिहास और उनके पीछे छुपी रोचक जानकारी का विवरण।

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Photo: Patrika

Rajasthan district names origin: राजस्थान भारत का एक ऐतिहासिक राज्य है, जहां हर शहर और जिले का नाम अपने भीतर एक कहानी समेटे हुए है। इन नामों के पीछे कहीं वीर शासकों का योगदान है तो कहीं भूगोल और स्थानीय संस्कृति का प्रभाव। इन सभी तथ्यों के बीच एक रोचक बात यह है कि ज्यादातर जिलों के नाम उनके संस्थापकों या ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े हुए है। जानिए राजस्थान के विभिन्न जिलों का नाम कैसे पड़ा?

जिला और जिले के नामकरण का इतिहास-

  • जयपुर जयपुर शहर की स्थापना आमेर के कछवाहा राजपूत शासक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 18 नवंबर 1727 को की थी। उन्हीं के नाम 'जय' और शहर के लिए 'पुर' (नगर) को मिलाकर इस शहर का नाम 'जयपुर' पड़ा।
  • जोधपुर– जोधपुर जिले का नाम राठौड़ वंश के शासक राव जोधा के नाम पर पड़ा है। राव जोधा ने 12 मई 1459 को इस शहर की स्थापना की थी और मंडोर के स्थान पर इसे अपनी नई राजधानी बनाया।
  • बीकानेर– बीकानेर जिले का नाम इसके संस्थापक राव बीका के नाम पर पड़ा है। 1488 ईस्वी में जोधपुर के राव जोधा के पुत्र राव बीका ने 'जांगलदेश' नामक बंजर क्षेत्र को जीता और वहां एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की, जिसे 'बीका की बस्ती' या बीकानेर कहा गया।
  • उदयपुर– उदयपुर जिले का नाम मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह द्वितीय के नाम पर पड़ा है। उन्होंने 1559 में इस शहर की स्थापना की थी और इसे मेवाड़ की नई राजधानी बनाया था।
  • अजमेर– अजमेर की स्थापना 7वीं या 11वीं शताब्दी में चौहान वंश के शासक अजयराज चौहान द्वारा की गई थी। इस शहर का पुराना नाम 'अजयमेरु' था जो समय के साथ बदलकर 'अजमेर' बन गया।
  • श्रीगंगानगर– श्रीगंगानगर का नाम बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह के नाम पर रखा गया है। उन्होंने 26 अक्टूबर 1927 को इस शहर की स्थापना की थी।
  • प्रतापगढ– महारावत प्रतापसिंह ने देवलिया की भौगोलिक स्थिति उपयुक्त न होने के कारण नई राजधानी बसाई थी। इसका नाम प्रतापगढ रखा गया था।
  • कोटा– कोटा जिले का नाम कोटिया भील नामक स्थानीय शासक के नाम पर पड़ा। उन्होंने 13वीं शताब्दी के आसपास चंबल नदी के किनारे अकेलगढ़ क्षेत्र में एक छोटा किला (कोट) बनाया था। बाद में समय के साथ यह 'कोटा' के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
  • बूंदी– बूंदी जिले का नाम यहां के स्थानीय शासक बूंदा मीणा के नाम पर रखा गया था। 13वीं-14वीं शताब्दी में, हाड़ा राव देवा ने जैता मीणा से यह क्षेत्र जीता था, लेकिन इसे बूंदा मीणा की याद में 'बूंदी' ही रहने दिया।
  • भरतपुर– भरतपुर जिले की स्थापना महाराजा सूरजमल ने 1733 ईस्वी में की थी और इसका नाम भगवान राम के भाई 'भरत' के नाम पर रखा गया है।
  • अलवर– अलवर जिले का नाम 11वीं शताब्दी में आमेर के राजा काकिलदेव के दूसरे बेटे अलघराज के नाम पर पड़ा, जिन्होंने 1049 ईस्वी में यहां 'अलघपुर' नगर बसाया था। समय के साथ यह नाम अलघपुर से अलवार और फिर अलवर बन गया।
  • धौलपुर– धौलपुर जिले का नाम 8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच तोमर शासक राजा धवल देव के नाम पर पड़ा, जिन्होंने इस शहर की स्थापना की थी।
  • करौली– करौली जिले का नाम यहां के यदुवंशी राजपूत शासक महाराजा अर्जुन पाल द्वारा 1348 ईस्वी में बनाए नगर के कारण पड़ा।
  • टोंक– ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार,1643 में भोला ब्राह्मण को दिए गए 'टोकरा' जनपद के 12 गांव बाद में 'टोंक' कहलाए। इस क्षेत्र को प्राचीन काल में 'टक्का' या 'टक्का नगरी' भी कहा जाता था।
  • झालावाड़– झालावाड़ का नाम झाला राजपूतों के नाम पर पड़ा है। यह शब्द 'झालाओं की भूमि' को दर्शाता है। इस क्षेत्र की स्थापना कोटा राज्य के दीवान, झाला जालिम सिंह ने 1791 में की थी।
  • चित्तौड़गढ़– चित्तौड़गढ़ का नाम 7वीं शताब्दी में मौर्य वंश के शासक राजा चित्रांगद मौर्य द्वारा बसाए जाने के कारण पड़ा, जिन्होंने इस किले का निर्माण करवाया था और इसे 'चित्रकूट' नाम दिया था। आगे चलकर यह 'चित्रकूट' से 'चित्तौड़' और बाद में 'चित्तौड़गढ़' के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
  • जालोर– जालोर का नाम महर्षि जाबालि ऋषि के नाम पर पड़ा, जो प्राचीन काल में यहां रहते थे और उन्होंने इसी जगह तपस्या की थी। इस प्राचीन स्थान को पहले 'जाबालीपुर' के नाम से जाना जाता था, जो समय के साथ बदलकर 'जालोर' हो गया।
  • सिरोही– सिरोही का नाम सिरानवा पहाड़ियों के कारण पड़ा। 1425 ईस्वी में देवड़ा चौहान शासक सहसमल ने सिरनवा पहाड़ी के पूर्वी ढलान पर इस शहर को बसाया था। कर्नल टॉड के अनुसार, रेगिस्तान के शीर्ष (सिर-रोही) पर स्थित होने के कारण भी इसे सिरोही कहा जाता है।
  • नागौर– नागौर का नाम नागा राजपूतों के नाम पर पड़ा है। 'द इम्पीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया 1908' के अनुसार, नागवंशीय शासकों द्वारा बसाए जाने के कारण इसे नागौर कहा गया।
  • बांसवाड़ा– बांसवाड़ा का नामकरण मुख्य रूप से यहां पाए जाने वाले बांस के जंगलों और भील शासक बांसिया के नाम पर पड़ा है।
  • डूंगरपुर– डूंगरपुर का नाम 14वीं शताब्दी के अंत में मेवाड़ के रावल वीर सिंह द्वारा एक भील सरदार 'डूंगरिया' के नाम पर रखा गया था।
  • बारां– राजस्थान के बारां का नाम 14वीं-15वीं शताब्दी में सोलंकी राजपूतों के शासनकाल के दौरान 12 गांवों को मिलाकर बसाए जाने के कारण पड़ा।
  • राजसमंद– राजसमंद का नाम मेवाड़ के महाराणा राज सिंह द्वारा 17वीं शताब्दी (1662-1676) में बनवाई गई प्रसिद्ध राजसमंद झील (राजसमुद्र झील) के नाम पर पड़ा है।
  • सवाई माधोपुर– सवाई माधोपुर का नाम जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह प्रथम के नाम पर रखा गया है। उन्होंने 1763 में इस शहर की स्थापना की थी।
  • भीलवाड़ा– भीलवाड़ा का नाम मुख्य रूप से यहां रहने वाली भील जनजाति के कारण पड़ा है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, यह क्षेत्र 'भीलों का बाड़ा' (भीलों का क्षेत्र) कहलाता था।
  • झुंझुनूं – झुंझुनूं का नाम 'जुझार सिंह नेहरा' नामक एक जाट सरदार की याद में रखा गया है। उन्होंने 18वीं शताब्दी की शुरुआत में इस शहर को बसाया था।
  • सीकर– सीकर की स्थापना राव दौलत सिंह ने 1687 ईस्वी में की थी, जिसका पुराना नाम 'वीरभान का बास' था। खंडेला के राजा के पुत्र दौलत सिंह ने इसे एक गढ़ के रूप में बसाया था। पहाड़ी पर बसे होने के कारण इसे 'शिखर' कहा जाने लगा, जो बाद में 'सीकर' कहलाया।
  • पाली– प्राचीन समय में पाली एक बहुत बड़ा व्यापारिक केंद्र था। यहां मारवाड़ के व्यापारी (खासतौर पर पालीवाल ब्राह्मण) रहते थे। वे लोग यहां बस गए थे, इसलिए जगह का नाम भी पाली पड़ गया।
  • जैसलमेर– जैसलमेर का नाम भाटी राजपूत शासक रावल जैसल सिंह के नाम पर पड़ा है। 1156 ईस्वी में उन्होंने थार रेगिस्तान में 'त्रिकुटा पहाड़ी' पर एक मिट्टी का किला बनवाया और उसे अपनी राजधानी घोषित किया, जिसे उन्होंने अपने नाम पर 'जैसलमेर' कहा। 'मेर' का मतलब 'पहाड़' (मेरु) से है, इस नाम का अर्थ है जैसल का पहाड़।
  • बाड़मेर– बाड़मेर का नाम 13वीं शताब्दी के परमार (पंवार) शासक बाहड़ राव परमार के नाम पर पड़ा है। उन्होंने एक छोटा सा शहर बसाया था, जिसे 'बाहड़मेर' यानी बाहड़ का किला कहा गया, जो समय के साथ बदलकर बाड़मेर हो गया।
  • डीग- डीग का नाम प्राचीन 'दीर्घापुर' से पड़ा। 7 अगस्त 2023 को भरतपुर से अलग होकर यह नया जिला बना, जो अपने ऐतिहासिक ​किले और पानी के महलों के लिए प्रसिद्ध है।
  • बालोतरा– बालोतरा का नाम वालोजी या बालाजी मनना राजपुरोहित के नाम पर रखा गया है। यह राजस्थान का एक नया जिला है, जो 7 अगस्त 2023 को बाड़मेर जिले से अलग होकर अस्तित्व में आया।
  • ब्यावर– ब्यावर जिले का नाम कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन द्वारा बसाए गए एक नजदीकी गांव 'ब्यावर खास' के नाम पर पड़ा। 1836 में कर्नल डिक्सन द्वारा मेरवाड़ा बटालियन के मुख्यालय के रूप में इसे विकसित किया गया था।
  • डीडवाना-कुचामन– यह जिला नागौर जिले का विभाजन करके बनाया गया है।। इस जिले का नाम इसके दो प्रमुख शहरों डीडवाना और कुचामन सिटी को मिलाकर रखा गया है।
  • कोटपूतली-बहरोड़- कोटपूतली-बहरोड़ का नामकरण राजस्थान सरकार द्वारा 2023 में किया गया, जिसमें अलवर जिले के बहरोड़ और जयपुर जिले के कोटपूतली क्षेत्रों को मिलाकर यह नया जिला बनाया गया। यह नाम जिले के दो सबसे महत्वपूर्ण कस्बों, कोटपूतली और बहरोड़ के नामों को जोड़कर रखा गया है।
  • भर्तृहरि नगर- खैरथल-तिजारा एक नया जिला है, जो मूल रूप से अलवर जिले से अलग होकर बना है। यह जिला अपनी 2 प्रमुख तहसीलों खैरथल और तिजारा के नामों को मिलाकर बनाया गया। तिजारा के पास स्थित बाबा भर्तृहरि की प्रसिद्ध तपोभूमि (भर्तहरी गुंबद) के सम्मान में राजस्थान सरकार ने इसका नाम बदलकर भर्तृहरिनगर कर दिया।
  • फलोदी– फलोदी का नाम श्री सिद्धु कल्ला की बेटी 'फला' के अनुरोध पर रखा गया था। इस शहर का पुराना नाम 'फलवर्धिका' था, जिसे 15वीं शताब्दी में मां लटियाल के आशीर्वाद से बसाया गया था।
  • सलूंबर– राजस्थान के सलूंबर का नाम ऐतिहासिक रूप से सोनारा भील नामक व्यक्ति के नाम पर रखा गया है, जो पहले यहां की बस्ती 'सोनारिया' के शासक थे। कुछ इतिहासकार 'सलूंबर' नाम को संस्कृत शब्द 'शाल' (साल के पेड़) और 'अंबर' (आकाश या विस्तार) से भी जोड़ते हैं, जो क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का संकेत देता है।
  • चूरू- चूरू का नाम 1620 ईस्वी के आसपास चूहड़ू (या चुरु) जाट नामक सरदार द्वारा इस शहर की स्थापना किए जाने के कारण पड़ा। लोक मान्यताओं और स्थानीय इतिहास के अनुसार, इस स्थान को चूहड़ू जाट ने बसाया था, इसलिए उन्हीं के नाम पर इस शहर और बाद में जिले का नाम 'चूरू' रखा गया।
  • दौसा- दौसा का नाम पास ही स्थित देवगिरि पहाड़ी के नाम पर पड़ा है। यह प्राचीन शहर दौसा, इस पहाड़ी के नीचे बसा हुआ है। संस्कृत के अनुसार, इसका नाम 'धौ-सा' से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'स्वर्ग के समान सुंदर'।
  • हनुमानगढ़- हनुमानगढ़ का नाम बीकानेर के राजा सूरत सिंह ने रखा था। 1805 ईस्वी में, मंगलवार (हनुमान जी का दिन) के दिन भाटी राजपूतों से भटनेर का किला जीतने के बाद, उन्होंने इसका नाम बदलकर 'हनुमानगढ़' कर दिया। इससे पहले, यह स्थान भटनेर के नाम से जाना जाता था।