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मामूली नहीं, ‘काला सोना’ है आपके बाल, राजस्थान में दो सौ करोड़ तक पहुंचा कारोबार

चार-पांच हजार रुपए किलो में घर-घर से एकत्रित किए जा रहे बाल, ट्रीटमेंट के बाद एक विग बेचा जा रहा 40-50 रुपए में, प्रदेश में तेजी से लोग जुड़ रहे इस व्यापार से, इकठ्ठा करने से लेकर ट्रीटमेंट तक हो रहा, यहां से कोलकाता, चेन्नई होते हुए चीन, दक्षिण अफ्रीका, अमरीका, ब्रिटेन पहुंच रहे

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मामूली नहीं, 'काला सोना' है आपके बाल, राजस्थान में दो सौ करोड़ तक पहुंचा कारोबार

भवनेश गुप्ता / जया गुप्ता / जयपुर। सिर पर लहराते बाल लाख के तो झड़े बाल करोड़ों के...। लोगों को यह बात अब समझ में आ रही है। जिन्होंने बालों की कीमत समझी, उन्होंने इसे व्यापार का जरिया बना लिया और अब उनके लिए यह काला सोना बन गया है।

राजस्थान में बालों का सालाना करोबार 200 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें पिछले दो साल में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इनके ट्रीटमेंट के लिए प्रदेश में भी फैक्ट्रियां संचालित हो रही है। यहां से बाल पश्चिम बंगाल होते हुए चीन, दक्षिण अफ्रीका, अमरीका, ब्रिटेन पहुंच रहे हैं। इनसे विग के अलावा ब्यूटी प्रोडक्ट्स (हेयर एक्टेंशन, हेयर पैच आदि) बनाए जा रहे हैं। खास यह है कि बाल इतने अनमोल हो गए कि इनकी चोरी की घटनाएं भी बढ़ती जा रही है।

राजस्थान में स्थिति

-65 से ज्यादा व्यापारी हैं राजस्थान में

-7200 किलो बाल खरीद-बेच रहे

-4-5 हजार रुपए किलो दर पर खरीद रहे

-15-25 हजार रुपए किलो तक बेच रहे ट्रीटमेंट के बाद

-40-50 हजार रुपए तक बिक रहा राजस्थान के लोगों के बालों से बना विग

-200 ग्राम बाल होते हैं महिलाओं के एक विग में

-10 से 30 इंच लम्बाई वाले बाल हैं उपयोगी

तीन चरण...

1. कलेक्शन : फेरीवाले घर-घर जाकर महिला, युवतियों के बालों को एकत्रित कर रहे हैं और फिर इन्हें बड़े व्यापारी खरीद रहे हैं। इसके अलावा सैलून, पार्लर से खरीदे जा रहे हैं।

2. ट्रीटमेंट : फैक्ट्री में कैमिकल में बालों की धुलाई, पॉलिशिंग की जाती है। सीरम व कंडीशन लगाया जाता है। कारीगर पैच में बालों की बुनाई करता है। 200 ग्रामों बालों का विग बनाने में तीन से पांच दिन का समय लगता है।

3. सप्लाई : कोलकाता, चेन्नई के स्थानीय व्यापारियों को बेचते हैं। यहां बालों के ट्रीटमेंट का अंतिम प्रोसेस होता है। यहां से बाल चीन, दक्षिण अफ्रीका, अमरीका, ब्रिटेन भेजे जाते हैं।

उत्तर से ज्यादा दक्षिण में कीमत ज्यादा

दक्षिण भारतीय महिलाओं के बाल - 35-40 हजार रुपए प्रति किलो

उत्तर भारतीय महिलाओं के बाल - 15-25 हजार रुपए प्रति किलो

गोली बाल (जो बाल कंघा करने के दौरान झड़ते हैं और महिलाएं उन्हें एकत्रित करती हैं)- 4 से 5 हजार रुपए प्रति किलो

चोरों का बालों पर निशाना

केस 1- जयपुर के संजय सर्किल थाना इलाके में चोर माली कॉलोनी निवासी नरेश के गोदाम का ताला तोड़ कर करीब 100 किलो बाल चुरा ले गए। चोरी का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी भी, लेकिन सफलता नहीं लगी।

केस 2- चुरू में नोहर निवासी व्यापारी ने 2 क्विंटल बाल चोरी करने का मामला पिछले वर्ष सितम्बर में हुआ। यहां बाल से भरे नौ बोरे लेकर व्यापारी नोहर से जयपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ था। रूट के बीच रुके और चैक किया तो पचास-पचास किलो वजन के चार बोरे गायब मिले।

वैश्विक स्तर पर बढ़ी मांग से राजस्थान में भी बढ़ा व्यापार

व्यापारियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर बालों की मांग तेजी से बढ़ी है। कुछ वर्ष पहले तक दक्षिण भारत में ही यह व्यापार फल-फूल रहा था, अब राजस्थान समेत उत्तरी भारत में भी व्यापार बढ़ रहा है। हालांकि, बालों की ज्यादातर फैक्ट्रियां कोलकाता और चेन्नई में है। दुनियाभर में होने वाले बालों के कारोबार में 90 फीसदी हिस्सा भारतीय बालों का है। इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में बालों का पूरा कारोबार 1.25 हजार करोड़ का हुआ।

-अभी तक बालों की मांग विदेशों में ही थी, अब भारत में भी काफी मांग होने लगी है। बालों का बाजार बहुत बड़ा है, इसे काला सोना कहा जाता है। रॉ बाल खरीदकर उनसे अलग-अलग प्रकार के प्रोडक्टस बना रहे हैं। राजस्थान भी व्यापार का बड़ा हिस्सा बनता जा रहा है।
-शताक्षी गुप्ता, हेयर एक्सपर्ट, दिल्ली

-विग और अन्य हेयर ट्रीटमेंट की मांग बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि पिछले तीन साल में व्यापार में 40 प्रतिशत तक तेजी आई है। राजस्थान में कई लोग इस व्यापार से जुड़े हैं। ज्यादातर बाल कोलकाता भेजते हैं, जहां से विदेशों में बेचे जा रहे हैं।
-मनमोहन महेन्द्रा, व्यापारी, जयपुर