जयपुर. कहा जाता है कि ज्ञान जितना बांटोगे वो उतना ही बढ़ेगा ( The more you divide knowledge, the more it will grow ) . यही मानना है 2001 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. कृष्णा कांत पाठक ( IAS K. K. Pathak ) का. संस्कृत और दर्शनशास्त्र ( Sanskrit and philosophy ) के विद्यार्थी रहे डॉ. पाठक ने पत्रिका से रूबरू होते हुए जीवन और प्रोफेशन ( Story of Life and Profession ) से जुड़े हर एक पहलू पर बात की. उन्होंने बताया कि पहले कभी यह सोचा नहीं था कि कभी आईएएस बनूंगा. लेकिन डॉ. कृष्णा कांत पाठक का मानना है कि विद्या को लोगों को साथ बांटना चाहिए. यही से व्यक्ति को सफलता मिलना शुरू होती है. डॉ. पाठक से विशेष बातचीत की हमारे संवाददाता अरविंद पालावत ने. आइए आपको दिखाते है कि किस तरह उन्होंने यह सफलता हासिल की. और किस तरह युवा अपना करियर बना सकते है: