
राजमंदिर गोल्डन जुबली, पत्रिका फोटो
Rajmandir Golden Jubilee: राजमंदिर… जो सिर्फ एक सिनेमाघर ही नहीं, बल्कि गुलाबी नगर की वह चमक है, जिसने बीते पांच दशकों से लाखों लोगों के सपनों को बड़े पर्दे पर संजोया है। यहां सिर्फ फिल्में ही नहीं चलीं, बल्कि मोहब्बत, रिश्ते, यादें और वक्त भी पर्दे के साथ आगे बढ़ता रहा। राज मंदिर ने देश-दुनिया के लोगों को फिल्मी दुनिया का अहसास कराया है।
एक जून को राज मंदिर अपने 50 वर्ष पूरे कर लेगा। इसका उद्घाटन 1 जून 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने किया था। वर्ष 1976 में यहां पहली फिल्म ‘चरस’ लगी, जिसमें मुख्य भूमिका में धर्मेन्द्र देओल और हेमा मालिनी रहे।
राज मंदिर सिनेमाघर के मैनेजर अशोक तंवर के मुताबिक, राज मंदिर की यह गोल्डन जुबली सिने लवर्स को डेडिकेट होगी। इस दिन यहां 4 शो में चार फिल्में दिखाई जाएगी, जो नि:शुल्क रहेगी। यहां दिखाई जाने वाली फिल्मों में ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘राम तेरी गंगा मैली’, ‘हम आपके हैं कौन’ और ‘अमर अकबर एंथोनी’ फिल्में शामिल हैं।
सिने लवर्स को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर फिल्म दिखाई जाएगी। जिसके फ्री टिकट बुक माय शो और राज मंदिर के टिकट काउंटर पर मिलेंगे।
बीते 50 वर्षों से यहां कार्यरत किशोर कुमार काला का कहना है कि जब राज मंदिर बना था, तब यहां 1168 सीटें थी। लेकिन सिने लवर्स को आराम और अच्छी सुविधा देने के लिए बड़ी सीटें लगाई गई। वर्तमान में 862 सीटें है। यहां ज्यादातर 4 शो चलते आए हैं।
सबसे ज्यादा अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान की फिल्में लगी है। अब तक 400 से भी अधिक फिल्में स्क्रीन पर लग चुकी है। काला का कहना है कि हालांकि हमने 50वीं वर्षगांठ 2025 में मना ली, तब यहां शोले फिल्म लगी थी। उन्होंने कहा कि पहले यहां टिकट के लिए लाइनें लगा करती थी। लेकिन अब टिकटें ऑनलाइन हो गई है।
इंचार्ज अंकुर खंडेलवाल ने बताया कि अगस्त 1985 में लगी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ और वर्ष 1994 में लगी फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ दोनों फिल्में यहां 75-75 सप्ताह तक चली थी। उस समय लोग पहले से ही टिकट लेकर परिवार या दोस्तों के साथ फिल्म देखने की प्लानिंग बना लेते थे।
राज मंदिर की असली कहानी उन चेहरों में बसती है, जो कभी पर्दे पर दिखाई नहीं दिए। हाथों से टिकट फाड़ने वाले कर्मचारी, रील बदलते प्रोजेक्शनिस्ट, इंटरवल में भागते कैंटीन कर्मचारी, इन सबने मिलकर इस सिनेमाघर को सिर्फ थिएटर नहीं, बल्कि जयपुर की सांस्कृतिक धड़कन बनाया है। पुराने कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने यहां फिल्मों से ज्यादा लोगों की भावनाएं देखी हैं। किसी को पहली डेट पर आते, किसी को परिवार संग जश्न मनाते और किसी को फिल्म खत्म होने के बाद रोते हुए लौटते देखा है।
Published on:
26 May 2026 07:41 am
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
