
केंद्र माना तो पीसीपीआइआर, नहीं तो सरकार अपने दम बनाएगी पेट्रो जोन
जयपुर. लंबे समय से केंद्र सरकार के पास अटके प्रदेश के महत्वकांक्षी औद्योगिक प्रोजेक्ट 'पेट्रोलियम, केमिकल एवं पेट्रोकेमिकल इन्वेस्टमेंट रीजन' (पीसीपीआइआर) को लेकर राज्य सरकार ने अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। केंद्र से यदि इस परियोजना को लेकर मंजूरी नहीं मिलती है तो सरकार अब इसे अपने दम पर विकसित करेगी। यदि राज्य अपने संसाधनों से इसे विकसित करता है तो परियोजना को ' राजस्थान पेट्रो जोन' के नाम से जाना जाएगा। पेट्रो जोन को सिरे चढ़ाने के लिए सरकार ने इन्वेस्ट राजस्थान से ठीक पहले मुख्य सचिव उषा शर्मा की अध्यक्षता में एक अधिकार प्राप्त समिति का गठन कर दिया, जिसकी पहली बैठक सोमवार को हुई। बैठक में उद्योग विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव वीनू गुप्ता ने बताया कि परियोजना के पहले चरण में एक हजार करोड़ रुपए की लागत से 50 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र विकसित किया जाएगा। परियोजना से 25 हजार करोड़ रुपए के निवेश का आकलन किया गया है।
साल भर से केंद्र के पास लंबित
पीसीपीआइआर को लेकर पिछले साल जून में राज्य ने अपना औपचारिक प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रख दिया था। सितंबर में उद्योग विभाग के अधिकारी केंद्र को पूरा विजन प्लान बता आए। मामला केंद्रीय हिस्सेदारी और आधिकारिक अधिसूचना पर तभी से लटका हुआ है।
बोरावास में 100 करोड़ से काम शुरू
पेट्रो जोन में सरकार की पचपदरा में बोरावास कलावा और रामनगर थोब औद्योगिक क्षेत्रों की योजना है। रीको एमडी शिवप्रसाद नकाते ने बैठक में बताया कि प्रथम चरण में बोरावास में 100 करोड़ की लागत के कार्य शुरू भी हो गए हैं।
मास्टर प्लान और मंजूरियां जल्द
मुख्य सचिव ने एमडी रीको को निर्देश दिए हैँ कि पेट्रो जोन का मास्टर प्लान शीघ्र तैयार करें। क्षेत्र के लिए पर्यावरणीय अनुमति जल्द ली जाए।
Published on:
13 Sep 2022, 7:50 PM IST
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