
जयपुर . सुप्रीम कोर्ट के अवैध खनन बंद करने के आदेशों का राजधानी के आसपास क्षेत्रों में ही उल्लंघन हो रहा है। रोज पहाड़ों से पत्थर निकालकर सरेआम बेचे जा रहे हैं। अवैध खनन रोकने वाली मशीनरी यहां कहीं नहीं दिखी। उधर, बजरी की तस्करी रोकने के जिम्मेदार ही माफिया की मदद करते दिखाई दे रहे हैं। पत्रिका टीम आगरा रोड स्थित लूनियावास से सटे खोरी रोपड़ा गांव पहुंची तो यह हकीकत सामने आई। यहां किसी को लीज नहीं दे रखी फिर भी लोग पहाड़ी को छलनी करते नजर आए।
खोरीरोपड़ा गांव में अवैध रूप से पत्थर का खनन हो रहा है। पहाड़ के अहाते अलसुबह ही ट्रैक्टर खड़े हो जाते हैं। गिरोह के कुछ लोग बाइक पर सवार होकर रैकी करते है। इसके बाद ये अवैध रूप से पत्थरों की खुदाई में जुट जाते है। स्थानीय लोग कई बार पुलिस व प्रशासन को सूचना भी देते है, लेकिन वे फोरी कार्रवाई करके चली जाती है। इसके अलावा इस मामले में खनन विभाग भी लापरवाह बना हुआ है। विभाग को सूचना होने के बावजूद इस पर रोक के कोई उपाय नहीं किए हुए है।
रु. 800 की ट्रॉली
गिरोह के लोग बिना अनुमति पहाड़ की खुदाई कर ट्रॉलियां भरकर ले जाते है। बाजार में एक ट्रॉली करीब 800 से 1000 रुपए में बेच देते है।
भाजपा पार्षद की शिकायत, कार्रवाई नहीं : वार्ड 50 की पार्षद कमलेश कासोटिया ने बताया कि कई बार खनन विभाग, पुलिस कमिश्नर और संबंधित पुलिस को शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है।
बजरी से भरे ट्रैक्टर, दो पुलिस कर्मी कर रहे थे एस्कोर्ट
अवैध रूप से बजरी की सूचना पर पत्रिका टीम जामडोली स्थित केशव विद्यापीठ रोड पहुंची तो तीन ट्रैक्टरों में बजरी ले जाई जा रही थी। टीम ने देखा कि सादा वर्दी में दो पुलिसकर्मी (बाइक पर पुलिस का चिन्ह था) इसे एस्कोर्ट कर रहे थे।
दी धमकी, निकल गए
कैमरे से फोटो क्लिक होते देख बाइक सवार पुलिसकर्मी पहले तो घबराए, लेकिन बाद में धमकी देते हुए वहां से निकल गए। इसके बाद बजरी के तीनों ट्रैक्टर ब्रह्मपुरी चौकी के पास से गुजरते हुए आगे निकल गए।
Updated on:
07 May 2018 03:07 pm
Published on:
07 May 2018 04:35 pm
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