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शैलेन्द्र अग्रवाल /जयपुर। हाईकोर्ट ने राजस्थान में बजरी के अवैध खनन पर बिक्री पर सख्ती दिखाते हुए शिकंजा कसने की मंशा जाहिर की है। कोर्ट ने बजरी का अवैध खनन और परिवहन करने वालों तथा बिल्डरों पर की गई कार्रवाई के बारे में कलक्टर,एसआइटी व पुलिस महानिदेशक से अलग—अलग रिपोर्ट मांगी है। अब सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने संजय कुमार गर्ग की याचिका पर यह आदेश दिया है। गर्ग की ओर से अधिवक्ता संदीप शेखावत ने कोर्ट को बताया कि सरकारी एजेंसियों ने बजरी के अवैध खनन को लेकर आंख मूंद रखी है। हर रोज जयपुर शहर में करीब 500 ट्रक बजरी आती है और सरकारी मशीनरी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर रही है। प्रार्थीपक्ष की ओर से बजरी के अवैध खनन, परिवहन और गांवों में भंडारण के फोटो पेश किए गए। इनके जरिए यह भी बताया गया है कि निर्माण स्थलों पर भी खुलेआम बजरी का भंडारण हो रहा है। कोर्ट ने इस स्थिति को लेकर अतिरिक्त महाधिवक्ता से विभिन्न बिन्दुओं पर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
कोर्ट ने याद दिलाया आदेश
कोर्ट ने 3 मई के आदेश का हवाला देकर कहा है कि सभी जिला कलक्टरों को विशेष जांच दल बनाकर उन स्थलों पर छापा मारने को कहा गया था, जहां बजरी का उपयोग हो रहा है। बिल्डरों पर जुर्माना लगाने को भी कहा था। इसके लिए स्थानीय पुलिसकर्मियों की भी जिम्मेदारी तय की थी, ताकि बजरी की कालाबाजारी को रोका जा सके।
कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी
कलक्टर बताएं— कालाबाजारी रोकने के लिए क्या कार्रवाई की,जिलेवार बजरी के अवैध परिवहन, भंडारण की क्या स्थिति है और 3 मई के आदेश की पालना में क्या किया।
एसआइटी बताएं— अवैध बजरी को लेकर कितने मुकदमे दर्ज किए और कितने मामलों में चालान पेश किए। अवैध खनन, परिवहन व भंडारण को रोकने के लिए क्या किया। अवैध रूप से बजरी मंगा रहे बिल्डरों पर कितना जुर्माना लगाया।
डीजीपी बताए—पुलिस ने क्या कार्रवाई की। बजरी चोरी के मामले में कितनी गिरफ्तारियां की। अवैध खनन, परिवहन व भंडारण पर अन्य कोई कार्रवाई की हो, तो उसकी जानकारी दी जाए।
Published on:
20 Jul 2018 07:22 pm
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