
इंदिरा गांधी के महत्वपूर्ण फैसले Important decisions of Indira Gandhi
जयपुर 18 नवंबर
आपातकाल Emergency को लेकर विवादों में रही देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी को आखिर क्यों आयरन लेड़ी आॅफ इंडिया कहा जाता है। दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़े निर्णय लेनेवाली गांधी की कार्यशैली औरों से कुछ अलग थी। तेज तर्रार, तत्काल निर्णय क्षमता के चलते उन्होंने कुछ ऐसे बड़े फैसले लिए जिनका दूरगामी असर पड़ा और देश का इतिहास बदल गया। पाक के दो टुकड़े करवाकर बांग्लादेश के निर्माण के उनके फैसले की सराहना करते हुए उनके प्रमुख विपक्षी नेता अटल बिहारी वाजपेयी Atal Bihari Vajpayee ने इंदिरा को दुर्गा तक बता दिया था। आज हम आपको इंदिरा गांधी के ऐसे की कुछ फैसलों बड़े के बारे में बताते हैं।
19 जुलाई, 1969 को बैंकों का राष्ट्रीयकरण Nationalization of banks on 19 July 1969
1971 में पाक के टुकड़े करवाकर बांग्लादेश बनवाया Bangladesh was built in 1971 by making Pak pieces
1971 में प्रिवीपर्स यानि राजभत्ते को खत्म किया
1974 में परमाणु परीक्षण किया Nuclear test in 1974
1975-77 तक देश में आपातकाल लगाया Imposed Emergency in the country till 1975-77
1984 में ऑपरेशन मेघदूत के जरिए सियाचिन पर भारत का कब्जा
1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया Undertook Operation Blue Star in 1984
19 जुलाई, 1969 को इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक अध्यादेश पारित करके देश के 14 निजी बैंकों के राष्ट्रीयकरण कर दिया। इन 14 बैंकों में देश का करीब 70 फीसदी धन जमा था। अध्यादेश पारित होने के बाद इन बैंकों का मालिकाना हक सरकार के पास चला गया। ऐसा आर्थिक समानता को बढ़ावा देने के लिए किया गया था।
1971 में गांधी ने पाकिस्तान से युद्ध के बाद उसके दो टुकड़े करवा दिए। इस युद्ध में पाकिस्तान की शर्मनाक हार हुई और उसके 90,000 सैनिकों को भारत ने युद्धबंदी बना लिया था। तब अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें दुर्गा बताया Atal Bihari Vajpayee called him Durgaथा। गांधी का सबसे विवादास्पद फैसला 1975-77 के बीच लगाया आपातकाल था। हुआ यूं था कि इंदिरा गांधी के संबंध में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाया। छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक के साथ ही उनको संसद से भी इस्तीफा देने को कहा गया था। लेकिन इंदिरा गांधी ने हाई कोर्ट का फैसला मानने से इनकार कर दिया। उसके बाद देश भर में विरोध-प्रदर्शन होने लगे, उनके इस्तीफे की मांग उठी उसके बाद इंदिरा गांधी ने 25 जून, 1975 को आपातकाल लगा दिया और बड़ी संख्या में विरोधियों के गिरफ्तारी का आदेश दिया। भारतीय लोकतंत्र में इस दिन को 'काला दिन' कहा जाता है। आपातकाल करीब 19 महीने तक रहा।
बता दें कि आतंकी गतिविधियों के जरिए अलग देश खालिस्तान बनाने की मांग कर रहे जनरैल सिंह भिंडरावाले और उसके समर्थक जो कि स्वर्ण मंदिर में छिपे हुए थे। उन्हें मार गिराने के लिए गांधी के निर्देश पर भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' चलाया था। बाद में इसी बदला लेने के मकसद से इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी।
इससे पहले इंदिरा ने आॅपरेशन मेघदूत को अंजाम दिया था। दरअसल पाकिस्तान ने 17 अप्रैल, 1984 को सियाचिन पर कब्जा करने की योजना बनाई थी जिसकी जानकारी भारत को लग गई। भारत ने उससे पहले सियाचिन पर कब्जा करने की योजना बनाई और इस ऑपरेशन का कोड नाम 'ऑपरेशन मेघदूत' था। गांधी के जीवन का एक और सबसे अहम फैसला 1974 में पोखरण में परमाणु परीक्षण का था। इस पफैसले ने पूरे विश्व को चौका दिया था। इसके साथ भारत परमाणु शक्ति संपन्न देशबन गया। गांधी का राजभत्ता समाप्त करने का फैसला भी महत्वपूर्ण था। क्योंकि भारत में अपनी रियासतों का विलय करने वाले राजपरिवारों को एक निश्चित रकम देने की शुरुआत की गई थी। इस राशि को राजभत्ता या प्रिवी पर्स कहा जाता था। इंदिरा गांधी ने साल 1971 में संविधान में संशोधन करके राजभत्ते की इस प्रथा को खत्म किया। करके उनकी सहूलिएतें वापस ले ली थी। इसके अलावा इंदिरा ने अमेरिका के साथ मिलकर हरित क्रांति पर काम किया। देश में बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके किसानों को कम ब्याज दर पर कर्ज मुहैया कराए और खेती के सही तरीके तथा उसके जुड़ी कई अन्य जानकारियां किसानों को मुहैया कराई गई। पाक विभाजन के बाद से इंदिरा ने देश की गरीबी को हटाने का निश्चय किया। इसके लिए उन्होंने बीस सूत्रीय कार्यक्रम को जारी किया। बैंकों का विलीनीकरण, परमाणु परीक्षण जैसे फैसले लेने के कारण इंदिरा को आयरन लेडी कहा जाने लगा था
Published on:
18 Nov 2019 10:10 pm
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