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एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने, पेयजल व्यवस्था सुधारने और ग्रामीण विकास को लेकर अहम फैसले

PNG Connection: पेयजल संकट से निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी, हैंडपंप सुधार अभियान तेज। हर गांव का बनेगा मास्टर प्लान, 2047 के विजन पर काम शुरू।

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जयपुर

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Rajesh Dixit

Apr 07, 2026

LPG black marketing: जयपुर. प्रदेश में आमजन को राहत देने और व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों की समीक्षा करते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। खासतौर पर एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने, पेयजल व्यवस्था सुधारने और ग्रामीण विकास को लेकर अहम फैसले लिए गए हैं।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि जिला स्तर पर एलपीजी गैस की कालाबाजारी को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों में एलपीजी गैस की 100 प्रतिशत आपूर्ति बनी रहे, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्रों में 40 से 60 प्रतिशत सप्लाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही ऑटो एलपीजी पंपों को 24 घंटे चालू रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

उन्होंने आमजन को भरोसा दिलाया कि घरेलू एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है और इसकी सप्लाई पूरी तरह सुचारू रूप से जारी है। इसके अलावा पीएनजी कनेक्शन से जुड़ी फाइलों का शीघ्र निस्तारण करने और पाइपलाइन विस्तार कार्य को गति देने के निर्देश दिए गए हैं। आम लोगों को पीएनजी के फायदे समझाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल संकट से निपटने के लिए भी राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। मुख्य सचिव ने बताया कि 5 अप्रैल को चलाए गए विशेष अभियान के तहत 3055 हैंडपंपों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 604 खराब पाए गए। इनमें से 290 हैंडपंपों को मौके पर ही ठीक कर दिया गया।

इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में नहरबंदी (11 अप्रैल से 10 मई) के दौरान पानी की कमी न हो, इसके लिए डिग्गियों को भरने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। 10 अप्रैल से पहले सभी विभागीय डिग्गियों को पानी से भरना अनिवार्य किया गया है।

इसके साथ ही राज्य के समग्र विकास के लिए 'मुख्यमंत्री विकसित ग्राम एवं शहरी वार्ड अभियान' को भी गति दी जा रही है। इस अभियान के तहत हर गांव और वार्ड का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जिसमें स्थानीय जरूरतों और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाएगा। विशेषज्ञों और ग्रामीणों की भागीदारी से यह योजना तैयार होगी, जिससे वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।