
जयपुर/इमरान शेख़. G20 Summit 2023: दिल्ली में G-20 शिखर सम्मेलन के तहत प्रगति मैदान के भारत मंडपम में सजा अनोखा शिल्प बाजार जयपुर की हस्त कला से निखर रहा है। तीन दिवसीय शिल्प बाजार में विभिन्न राज्यों की उत्कृष्ट कला के बीच जयपुर की हस्तकला की नायाब नुमाइश भी देखने योग्य है। जहां पर लाख कला के हीरे आवाज़ मोहम्मद की हस्तकला को देखने के लिए देश-विदेश के मेहमान भी आ रहे हैं। 'मॉल ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर शिल्प बाजार में विभिन्न राज्यों की शिल्प कला के बीच आवाज़ मोहम्मद का हुनर विदेशी मेहमानों को लुभा रहा है।
हस्तशिल्पी कलाकार आवाज़ मोहम्मद ने बताया कि उम्मीद है कि G-20 के आयोजन से केंद्र शासित प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन और हस्तशिल्प क्षेत्रों को भी एक नया आयाम मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत में लाख का उपयोग प्राचीनकाल से होता आया है। महाभारत में तो लाख से कलात्मक महल बना देने का प्रसंग भी है। लाख की चूडिय़ां, कंगन, पाटले और शृंगार एवं सज्जा की अनेक कलात्मक वस्तुएं बनाई जाती हैं। विदेशियों को यह कला बहुत पसंद है। यह सौभाग्य की बात है कि हम G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान अपना काम प्रदर्शित करने के लिए यहां आए हैं।
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उन्होंने कहा कि कलाकार ऐसी प्रदर्शनियों के दौरान अधिकतम लाभ उठा सकते हैं, क्योंकि विदेशी उनके उत्पाद खरीद सकते हैं। आवाज़ मोहम्मद ने कहा कि G-20 प्रतिनिधियों को इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम के दौरान भारतीय कला की विविधता को देखने का मौका मिल रहा है और वे अपने ऑर्डर भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे मेरे काम के लिए सम्मानित किया गया है। विदेशी लोग इस कला को बहुत पसंद करते हैं। उन्हें बस ऐसे उत्पादों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
जयपुर के रहने वाले हैं आवाज़ मोहम्मद
कुशल हस्तशिल्पी आवाज मोहम्मद ने लाख कला को न केवल नए आयाम प्रदान किए हैं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत होकर अपनी पहचान भी कायम की है। इतना ही नहीं वे अपनी इस कला के दम पर विदेशों में भी राजस्थान की लाख कला का परचम फहरा चुके हैं। जयपुर के मिशन हाई स्कूल से दसवीं तक की शिक्षा प्राप्त करने वाले आवाज मोहम्मद ने डाइफिटर की ट्रेनिंग कर डिप्लोमा प्राप्त किया और उसके बाद स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज, उदयपुर और कोटा में फिटर का कार्य भी किया। सन 1967 में वहां की नौकरी छोड़कर आवाज मोहम्मद जयपुर आ गए और मनिहारों के रास्ते में रहकर लाख कला को परवान चढ़ाया।
पिता फैज मोहम्मद की सीख मानकर आव़ाज मोहम्मद ने चूडिय़ों के अलावा लाख के बटन बनाए जो बहुत लोकप्रिय हुए। उसके बाद तो उन्होंने लाख की नई-नई कलात्मक कृतियां बनाईं, जिससे इस कला को एक नई दिशा मिली। आवाज मोहम्मद ने बताया कि पहले सभी महिलाएं लाख का चूड़ा पहनती थीं। यह सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसके आकार- प्रकार और बनावट के आधार पर कई नाम होते थे। मसलन, लाख पट्टी का चूड़ा, मेथी का चूड़ा, बंद बंगड़ी का चूड़ा, गजरी का चूड़ा, चंदाबाई का चूड़ा, पतरी का चूड़ा, नोगरी का चूड़ा, लहरिया का चूड़ा और चवन्नी का चूड़ा आदि। पहले तो इन चूड़ों में सोने तक का पात लगता था। बाद में सोने के स्थान पर पीली पात और अब तो मिरगान लगा कर सोने का पीताभ का आभास कर लिया जाता है।
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होली पर देते हैं भाईचारे का पैगाम
होली के अवसर पर आवाज मोहम्मद गुलाल गोटों के जरिए भाईचारे का पैगाम देते हैं। वह कहते हैं कि होली का त्योहार करीब आते ही गुलाल गोटों की मांग बढ़ जाती है। गुलाल भरे इन लाख निर्मित गोटों को जब एक-दूसरे पर फेंककर फोड़ा जाता है तो स्नेह का रंग चारों और बिखर जाता है। वह बताते हैं कि लाख की चूडिय़ां, कंगन, पाटले और शृंगार एवं सज्जा की अनेक कलात्मक वस्तुएं बनाई जाती है। जहां तक गुलाल गोटे का सवाल है तो इन गोटों के जरिए राजपरिवारों में भी होली खेलने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी इस कला को विरासत में बच्चों को भी सौंप दिया है। जिसके चलते अब उनके लड़के-लड़कियां भी इस काम को जिम्मेदारी के साथ पूरा कर रहे हैं।
आवाज मोहम्मद ने लकड़ी, लोहे, कांच और प्लास्टिक के बर्तनों आदि पर भी लाख का कलात्मक कार्य किया है। उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन स्वीडन, डेनमार्क, दुबई, मस्कट, स्पेन, बहरीन, लंदन, दक्षिणी अफ्रीका आदि देशों में सराहना प्राप्त की। लाख कला के लिए इन्हें साल 1987-88 में राज्य स्तरीय मेरिट अवॉर्ड, साल 2009-10 में राष्ट्रीय स्तर पर मेरिट अवॉर्ड और साल 2012-13 में जयपुर के सिटी पैलेस में महाराजा भगवंतदास अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
Updated on:
09 Sept 2023 03:03 pm
Published on:
09 Sept 2023 02:47 pm
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