जयपुर. रवीन्द्र मंच पर फ्राइडे थिएटर के तहत आत्माराम सावंत के लिखे मराठी प्ले Óवरचा मजला रिकामाÓ का उर्दू नाट््य रूपांतरण ‘खुदा खैर करेÓ का मंचन मिनी थिएटर में शाम साढ़े छह बजे किया गया। वरिष्ठ रंगकर्मी राम सहाय पारीक निर्देशित इस सिचुएशनल कॉमेडी नाटक का संदेश था कि झूठ के पांव नहीं होते और झूठी आशाओं पर टिकी ङ्क्षजदगी और रिश्तों को बहुत दिनों तक स्थायी नहीं रख सकते।
पेशे से इंजीनियर, हेड मास्टर, बैंक मैनेजर हैं प्ले के कलाकार
पारीक ने बताया कि नाटक में सभी प्रमुख पात्र नौकरीपेशा और रिटायर हो चुके कलाकारों ने निभाए हैं। नाटक के मुख्य किरदार Óशराफत हुसैनÓ का किरदार निभाने वाले राजीव ÓअंकितÓ एनबीसी में सीनियर इंजीनियर हैं। Óनाना मामाÓ का किरदार निभाने वाले सुरेश मोहन सरकारी स्कूल में हेड मास्टर हैं। ÓशमीमÓ का किरदार निभाने वाली यूथिका नागर बैंक मैनेजर हैं। Óमिट्ठूÓ का पात्र निभाने वाले दिलीप ङ्क्षसह नरूका प्राइवेट जॉब करते हैं। Óपम्मीÓ बनीं सुदर्शिनी माथुर स्टूडेंट हैं और शौकिया रंगमंच करती हैं। मंच का प्रबंधन मोबाइल कंपनी में काम करने वाले कुशलेश शर्मा ने किया है। साउंड इफेक्ट धनेश वर्मा का है, जो बीएसएनएल में इंजीनियर हैं। पारीक ने बताया कि उनके ग्रुप में डॉक्टर और एडवोकेट भी हैं, जो इस प्ले का हिस्सा नहीं थे, लेकिन जुलाई में एक अन्य नाटक में एङ्क्षक्टग करेंगे। कुछ लोग ग्रुप के साथ शौकिया भी जुड़े हुए हैं।
नवाब के यहां झूठ बोलकर बना किराएदार
नाटक में शराफत हुसैन शादीशुदा है, लेकिन नवाब बड़े हुजूर के यहां झूठ बोलकर किराए से रहता है। नवाब उसे कुंआरा समझ अपनी बेटी पम्मी की शादी उससे करवा, हुसैन को घर जंवाई बनाना चाहता है। एक दिन शराफत की बीवी शमीम वहां आ जाती है। नवाब शमीमी से शादी के सपने देखने लगता है। आखिर में झूठ का पर्दाफाश हो जाता है।