
स्कूलों में आपातकालीन बचाव योजना शुरू होगी
जयपुर।
सर्वोच्च न्यायालय के बार-बार निर्देश देने के बाद भी प्राकृतिक आपदाओं और मानवजनित हादसों से बचाव के उपाय स्कूलों ने नहीं किए हैं, जो कि आपराधिक श्रेणी में माने जाते हैं। इतना ही नहीं स्कूलों ने विशेषज्ञों से आपदाओं से बचने की तैयारी की रिपोर्ट भी विभाग को नहीं भेजी है। अब आपदा प्रबंधन विभाग और शिक्षा विभाग लापरवाही बरतने वाले विद्यालयों की सूची बनाएंगे।
संस्था प्रधान व डीईओ की होगी जिम्मेदारी
यदि किसी भी विद्यालय में लापरवाही से किसी भी प्रकार की जान-माल की हानी होती है तो वह आपराधिक श्रेणी में आएगा। उसकी पूरी जिम्मेदारी संस्था प्रधान व संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी की होगी। उच्चतम न्यायालय व राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशानुसार विद्यालयों में आपातकालीन बचाव योजना बनानी होगी। इसमें विद्यालय का नाम पर पता देना होगा।
आपातकालीन बचाव योजना में ये करना होगा
— क्या संबंधित विभागों से आपातकालीन नंबरों की पुष्टि कर ली गई है
— क्या प्रधानाचार्य कक्ष में आपातकालीन नंबरों को प्रमुखता से दर्शाया गया है
— अधिकृत बिजली मैकिनिक द्वारा बिजली के तारों व उपकरणों की जांच की गई है
— विद्यालय के अंदर आग लगने के संभावित स्रोतों व ज्वलनशील चीजों की पहचान की गई है
— मुख्य कार्मिकों और कार्यबल टीम के प्रमुख, कक्षा अध्यापक, कार्यालय स्टॉफ व विद्यार्थियों की भूमिकाओं का स्पष्ट वर्णन है
— आपात स्थिति के दौरान व उसके बाद बच्चों की सुरक्षा व पर्यवेक्षण के लिए स्टॉफ पर्याप्त है
— मॉक ड्रिल के कैलेण्डर की व्यवस्था
— विद्यालय भवन बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार बना है
— विद्यालय में आपदा प्रबंधन व प्रथम सहायता किट की स्थिति
— आपातकाल की स्थिति में चेतावनी के लिए अलार्म है या नहीं
— विद्यालय स्तरीय आपदा प्रबंधन कमेटी है या नहीं।
बच्चों की सुरक्षा के संबंध में अधिकांश स्कूलों ने अभी तक सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों की पालना नहीं की है। अब स्कूलों की ऑडिट होगी। आदेश नहीं मानने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्कूल में लापरवाही से किसी की भी जान-माल की हानि हुई तो वह आपराधिक श्रेणी में आएगा।
प्रो.ए.के.सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सेफ्टी प्रोफेशनल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, नई दिल्ली
Published on:
26 Mar 2018 01:13 pm
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