
जयपुर. सवाई मानसिंह अस्पताल में गंभीर हालत में लाए जाने वाले मरीजों में पॉइजन व ड्रग की मात्रा की जानकारी चिकित्सकों को कुछ ही समय में मिल जाएगी। जिससे मरीज का इलाज जल्दी शुरु सकेगा और उसकी जान भी बचाई जा सकेगी। साथ ही यहां डीएनए जांच की सुविधा भी शुरु हो जाएगी। इसके लिए अस्पताल में पॉइजन डिटेक्शन एण्ड ड्रग लेवल लैब और डीएनए जांच लैब बनाई जा रही है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि भर्ती मरीजों में पॉइजन की मात्रा जांचने वाली राज्य में सरकारी अस्पताल की पहली लैब होगी।
दरअसल, सवाई मानसिंह अस्पताल की इमरजेंसी में पॉइजन के सेवन, दवा के ओवरडोज के सेवन या सर्पदंश के रोजाना 15 से 20 केस आते हैं। इनमें से कई मरीज गंभीर हालत में लाए जाते हैं। जिससे वह इलाज के दौरान पॉइजन की जानकारी बताने में असमर्थ होते हैं। इस स्थिति में चिकित्सकोंं को परिजनों से मिली हिस्ट्री व लक्षणों के आधार पर उनका इलाज शुरु करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में कई बार देरी हो जाती है जिससे मरीज की हालत बिगड़ जाती है। इस समस्या के राहत के लिए अस्पताल में पॉइजन डिटेक्शन एण्ड ड्रग लेवल लैब बनाई जा रही है। इसमें करीब एक करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसे फोरेंसिक मेडिसिन एण्ड टॉक्सिकोलॉजी विभाग में बनाया जाएगा। इसको लेकर काम शुरु हो गया है। हालांकि वर्तमान में टेंडर प्रक्रिया चल रही है। संभवत: इस साल के अंत तक यह बनकर शुरु हो जाएगी।
दावा..चार घंटे में मिलेगी रिपोर्ट
-पूछताछ में पता चला कि, इस लैब में जांच के लिए अत्याधुनिक मशीने लगेगी। जांच के लिए साइंटिफिक एक्सपर्ट लगाए जाएंगे। जांच के लिए ब्लड, यूरिन व उल्टी का सैंपल लिए जाएंगे। दावा किया जा रहा है कि महज तीन से चार घंटे में जांच रिपोर्ट मिल जाएगी। जबकि वर्तमान में विशेष परिस्थितियों में एसएफएल में सैंपल भेजे जा रहे हैं उनकी रिपोर्ट आने में छह से सात माह लग जाते हैं।
डीएनए लैब की भी तैयारी, बड़ी राहत
अस्पताल में करीब चार करोड़ रुपए में अस्पताल के दूसरे तक पर डीएनए लैब भी बनाई जा रही है। इसका काम भी चल रहा है। दो माह में इसकी भी मशीने आ जाएगी। जिसके बाद यहां डीएनए जांच की सुविधा शुरु हो जाएगी। बड़ी राहत है कि यहां से एसएफएल सैंपल नहीं भेजने पड़ेंगे साथ ही इंतजार भी खत्म हो जाएगा।
वर्जन
डीएनए जांच लैब व पॉइजन डिटेक्शन एण्ड ड्रग लेवल लैब बजट घोषणा है। दोनों लैब को लेकर काम शुरु हो गया है। यह जल्द शुरु हो जाएगी। इनके शुरु होने से बड़ी राहत मिलेगी। क्योंकि एफएसएल के चक्कर लगना बंद हो जाएगा और पेंडेंसी भी खत्म हो जाएगी।
डॉ. अचल शर्मा, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल
Published on:
24 May 2023 08:16 am

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