
विकास जैन
जयपुर. राज्य की चिकित्सा सेवाएं सिरमौर पर पहुंचने और एसएमएस (sms hospital) में रोबोट के इस्तेमाल के बावजूद अस्पतालों में मरीज को आज भी लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। उसके Òगोल्डन आवर्सÓ (golden hour) भारी भीड़, ऑपरेशन, जांच की वेटिंग में ही निकल रहे हैं। एक मरीज के साथ दो-चार तीमारदार न हों तो डॉक्टर से परामर्श, जांच कराने और दवा लेने में मरीज को 7 से 8 घंटे या कई दिन गुजारने पर मजबूर होना पड़ रहा है। हाल ही जिस राइट टू हेल्थ बिल पर चिकित्सकों और सरकार के बीच बड़ी रार हुई... उस बिल में भी सरकार ने ऐसा कोई वादा जनता से नहीं किया जिसमें मरीजों को कतार से मुक्ति मिल सके।
हालत यह है कि एसएमएस सहित सभी बड़े सरकारी अस्पतालों में आने वाले करीब 30 से 40 फीसदी मरीजों को उसी दिन पूरा इलाज नहीं मिल पाता। ऑपरेशन के अलावा जांच और दवा के लिए भी उन्हें बाद में आने के लिए कहा जा जाता है।
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इस मर्ज का इलाज सिर्फ तकनीक....मगर...
एसएमएस (sms) अस्पताल देश के सबसे बड़े आउटडोर (outdoor) मरीजों की संख्या वाले अस्पतालों में शामिल है। यहां रोजाना औसतन 10 हजार मरीजों सहित पूर साल में करीब 30 से 35 लाख मरीज आते हैं। इनके अलावा इनडोर मरीजों की संख्या अलग है। यह अस्पताल किसी शहर जैसा है, जहां रोजाना करीब 50 हजार लोगों की आवाजाही होती है। लेकिन तकनीक के इस्तेमाल में यह अब तक देश में सिरमौर नहीं बन पाया है। ऐसा ही हाल सबसे बड़े शिशु रोग अस्पताल जेके लोन सहित महिला और जनाना अस्पताल के हैं। प्रसूताओं और बच्चों को भी कई घंटों तक कतार में ही खड़े रहना पड़ रहा है।
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जो व्यवस्थाएं हैं..वे लागू ही नहीं हो पाई
एसएमएस सहित राज्य के अन्य बड़े अस्पतालों में आउटडोर सहित पंजीकरण व अन्य व्यवस्थाएं ऑनलाइन शुरू तो की गई है, लेकिन इच्छा शक्ति के अभाव में यह आज तक 20 प्रतिशत भी लागू नहीं हो पाई। एक वार्ड से दूसरे वार्ड, आउटडोर से दवा और जांच केन्द्रों तक एक-एक मरीज के परिजन भटकते रहते हैं।
हाल ऐसे
- जयपुरिया अस्पताल में सोनोग्राफी जांच के लिए भी 15 दिन बाद तक का समय दिया जा रहा है
- एसएमएस अस्पताल में साधारण जांच भी कई दिनों बाद हो पाती है
- एसएमएस में सीटी सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी और जेके लोन में शिशु रोग के ऑपरेशनों की वेटिंग भी कई दिनों बाद या महीनों बाद की मिल पाती है
- आउटडोर में रोजाना करीब 30 से 40 फीसदी मरीज ऐसे होते हैं, जो जिस डॉक्टर को दिखाने के लिए आते हैं...उसे नहीं दिखा पाते। ऐसे में दूसरे चिकित्सक को दिखाकर ही संतोष करना पड़ता है
रीडर कनेक्ट
-अस्पतालों में कैसे सुधरे व्यवस्था, ऊपर दिए क्यूआर कोड को स्कैन कर दें सुझाव
Published on:
07 Apr 2023 01:44 pm
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