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शिक्षा डिग्री मात्र नहीं, चरित्र और राष्ट्रनिर्माण की मजबूत नींव है: केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, दीक्षांत समारोह का हुआ आयोजन

उन्होंने कहा कि आज का युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत है और उससे अपेक्षा है कि वह नवाचार, आत्मनिर्भरता और ईमानदारी के साथ देश के विकास में योगदान दे।

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जयपुर। शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्रनिर्माण का सबसे सशक्त आधार है। विद्यार्थी ज्ञान के साथ संस्कार और जिम्मेदारी को भी अपनाएं, ताकि वे समाज और देश का नाम रोशन कर सकें। यह बात केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आज का युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत है और उससे अपेक्षा है कि वह नवाचार, आत्मनिर्भरता और ईमानदारी के साथ देश के विकास में योगदान दे।

मेघवाल ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर में बदलना ही सच्ची सफलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।

दीक्षांत समारोह के दौरान विभिन्न संकायों के स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के 1942 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि 41 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस प्रकार कुल 1983 डिग्रियों का वितरण किया गया। समारोह में विद्यार्थियों के चेहरों पर वर्षों की मेहनत और संघर्ष की संतुष्टि स्पष्ट दिखाई दी। अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी यह क्षण गर्व और भावुकता से भरा रहा।

शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय द्वारा 109 मेधावी विद्यार्थियों को पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 47 स्वर्ण, 32 रजत और 30 कांस्य पदक शामिल रहे। इन पुरस्कारों ने विद्यार्थियों को भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।

दीक्षांत समारोह में फाइनल ईयर के छात्र विशाल विशेष चर्चा का विषय बने। विशाल ने पढ़ाई के साथ-साथ 50 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन वाली कंपनी की स्थापना कर यह साबित किया कि युवा अगर ठान ले तो शिक्षा के साथ उद्यमिता में भी नई ऊंचाइयां छू सकता है।

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रवीण चौधरी ने विद्यार्थियों को शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय से प्राप्त डिग्री के साथ विद्यार्थियों की समाज के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि छात्र जहां भी कार्य करें, अपने आचरण, सोच और कर्म से विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को और ऊंचा करेंगे।

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