
खाने के तेलों का आयत रुकना चाहिए, तिलहन पैदावार पर सरकार का फोकस : PM मोदी
जगमोहन शर्मा / जयपुर. राज्य के सरसों तेल ( Mustard oil ) उद्यमियों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ( Central Government ) आने वाले बजट ( budget ) में आयातित तेलों की सीमा तय कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ( Prime Minister Narendra Modi ) ने संसद में हाल ही ऐसे संकेत दिए हैं। मोदी ने कहा है कि खाने के तेलों का इम्पोर्ट ( Stop Import Of Edible Oils In India) रुकना चाहिए। गौरतलब है कि वर्तमान में भारत अपनी घरेलू खपत का करीब 70 फीसदी खाद्य तेल आयात करता है। जिस पर करोड़ों रुपए की विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
फिलहाल सरसों सीड एमएसपी ( Msp ) से लगभग 700 रुपए प्रति क्विंटल नीचे बिक रही है। मंडियों में सरसों सीड के भाव 3500 रुपए के आसपास चल रहे हैं, जबकि सरसों का एमएसपी 4200 रुपए प्रति क्विंटल है। संसद में प्रधानमंत्री मोदी ने संकेत दिए हैं कि बजट में तेल व तिलहन की दशा सुधारने पर बड़ा ऐलान हो सकता है। प्रधानमंत्री का मानना है कि खाने के तेलों का आयात थमना चाहिए। उन्होंने कहा कि दलहन की तरह तिलहन ( Oilseed ) पैदावार बढ़ाने पर भी सरकार का फोकस रहेगा।
30 जुलाई तक जारी रहे खरीद
मस्टर्ड ऑयल प्रॉड्यूशर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (मोपा) ( Mustard Oil Producers Association of India ) के अध्यक्ष बाबूलाल डाटा एवं उपाध्यक्ष सुरेश चंद जैन ने पूर्व में केन्द्र सरकार को कई बार आयातित तेलों पर भारी इम्पोर्ट ड्यूटी ( Heavy import duty ) लगाने की मांग की है। डाटा ने सरकार को ये भी कहा है कि यदि किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिला, तो इस बार वह सरसों की बिजाई नहीं करेगा।
क्योंकि वर्तमान में सरसों एमएसपी से काफी नीचे बिक रही है। हालांकि नेफैड एमएसपी पर सरसों की खरीद कर रहा है, लेकिन वह भी सीमित ही है। मोपा ( Mopa ) ने मांग की है कि एमएसपी पर सरसों की खरीद 30 जुलाई तक जारी रहनी चाहिए।
Published on:
27 Jun 2019 03:28 pm

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