
Mustard Price: जाड़े में बढ़ी मांग, खाने का तेल में आई तेजी
जाड़े में तेलों की मांग बढ़ने और विदेशी बाजारों में खाद्य तेल महंगा होने से खाने के तेलों में ठहराव के बाद एक बार फिर तेजी का दौर शुरू हो गया है। तेल-तिलहन बाजार में सरसों, सोयाबीन और मूंगफली तेल-तिलहन, सीपीओ, पामोलीन और बिनौला तेल कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विदेशी बाजारों में हल्के खाद्य तेलों की मांग होने और इसके मुकाबले आपूर्ति कम होने से खाने के तेल की कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। तेल व्यापारियों का कहना है कि सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के शुल्क-मुक्त आयात का कोटा निर्धारित किये सरसों मिल डिलीवरी 42 प्रतिशत तेल कंडीशन के भाव 7000 रुपए प्रति क्विंटल तक जा पहुंचे। समर्थन पाकर एगमार्क सरसों तेल भी महंगा हो गया। राजधानी कृषि उपज मंडी कूकरखेड़ा स्थित गोयल फूड्स एंड एलाइड प्रॉडक्ट्स के संचालक एवं पावर ब्रांड सरसों तेल के राजस्थान के वितरक अतुल अग्रवाल ने बताया कि उपभोक्ता मांग निकलने से सोयाबीन एवं सरसों तेल के भाव वर्तमान में लगातार उछल रहे हैं।
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सावों की मांग से भी दाम हुए तेज
गौरतलब है कि सावों के सीजन के साथ—साथ जाड़े में खाने के तेलों की मांग बढ़ने के कारण पाम तेल उत्पादों में आयात बढ़ने की संभावना से मलेशिया में दाम उछल गए हैं। परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में भी इनकी कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। देश भर की उत्पादक मंडियों में सरसों की दैनिक आवक घटकर एक लाख बोरी के आसपास रह गई। इसी साल 15 सितंबर के आसपास 42 प्रतिशत तेल कंडीशन सरसों के भाव 6475 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास थे, जबकि दो माह के अंतराल में करीब 600 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई है। इस बीच राजस्थान, हरियाणा, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश में सरसों की बिजाई शुरू हो गई है। जानकारों के मुताबिक सरसों की फसल को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है। सरसों की फसल के लिए इन दिनों कई प्रकार के हाइब्रिड एवं उन्न्त किस्मों के बीज बाजार में उपलब्ध हैं। सरसों की फसल के बीज वैसे तो बहुत महंगे दामों में मिलते हैं। मगर किसान हाइब्रिड बीजों का प्रयोग करके अच्छी पैदावार ले सकता है।
Published on:
06 Nov 2022 01:10 pm
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