जयपुर। डाउन सिंड्रोम फेडरेशन ऑफ इंडिया (डी एस एफ आई) भारत में डाउन सिंड्रोम परिदृश्य के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए 14 से 17 सितंबर, 2023 तक जयपुर में अपना 7वां इण्डिया इण्टरनेशनल डाउन सिंड्रोम सम्मेलन (आई आई डी एस सी) आयोजित कर रहा है। आयोजन सचिव डॉ. विन्द्रा एवं डी एस एफ आई की संस्थापक डॉ. सुरेखा रामचंद्रन ने वरिष्ठ विकासात्मक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एस. सीतारमन, डॉ. धनंजय मंगल, डॉ. स्वाति घाटे और डॉ. शिखा गर्ग, जे.के लोन अस्पताल में कार्यरत डॉ. मनीषा गोयल ने बताया कि सम्मेलन में देश विदेश के ख्यतनाम चिकित्सकों के साथ करीब 400 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें डाउन सिंड्रोम से प्रभावित 100 से अधिक स्वयं अभिभावक भी शामिल होंगे।
सम्मेलन की विभिन्न गतिविधियों में डाउन सिंड्रोम और इस स्थिति से जुड़ी विभिन्न चिकित्सकीय समस्याओं के समाधान के बारे में चिकित्सा विशेषज्ञों की एक पैनल चर्चा के साथ स्व- अधिवक्ता को समाज का एक समावेशी हिस्सा बनाने में मदद करने के साधनों पर चर्चा करने के लिए बेरेपिसट्स की एक पैनल चर्चा होगी।
साथ ही डाउन सिंड्रोम से प्रभावित व्यक्तियों की प्रतिभा और क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी आयोजित की जाएंगी। एसे पीडितों को फिट रहने में मदद करने के साधन के रूप में खेलों को बढ़ावा देने के लिए एक क्रिकेट मैच भी होगा। इसके आलावा डी एस एफ आई पुरस्कार समारोह होगा। यह उन लोगों को सम्मानित करने के लिए है, जिन्होंने सिंड्रोम के लिए लगन से काम किया है। विशेषज्ञों ने बताया कि डाउन सिंड्रोम एक तरह की जेनेटिक प्रोब्लम है, लेकिन गर्भावस्था में टीकाकरण से इस समस्या से बचा जा सकता है।
डाउन सिंड्रोम लगभग 800 जीवित लोगों में से 1 को होता है। इसमें सीखने की क्षमकताओं की कमी, विकासात्मक देरी, चेहरे की विशिष्ट रचना पाई जाती है। मांसपेशियों का टोन कम होता है। डाउन सिंड्रोम से प्रभावित कई व्यक्तियों में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। स्क्रीनिंग और परीक्षणों से, बच्चे के जन्म से पहले और बाद में डाउन सिंड्रोम का पता लगाया जा सकता है।