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पक्षियों के लिए बना चुके हैं भारत के नेस्ट मैन राकेश 2.5 लाख से अधिक घोंसले

दिल्ली के नेस्ट मैन ऑफ इंडिया नाम से पहचाने जाने वाले राकेश खत्री अब तक गौरैयों के लिए 2.5 लाख से अधिक घोंसले बना चुके हैं। राकेश का गौरैयों के प्रति प्रेम और समर्पण उन्हें आम इंसानों से अलग बनाता है।
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जयपुर

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Vanshika Sharma

•

Updated: 14 Apr 2023, 5:47 PM IST

पक्षियों के लिए बना चुके हैं भारत के नेस्ट मैन राकेश 2.5 लाख से अधिक घोंसले

पक्षियों के लिए बना चुके हैं भारत के नेस्ट मैन राकेश 2.5 लाख से अधिक घोंसले

राकेश गौरैयों के लिए घोंसले बनाने को अपना आनंद का स्रोत मानते हैं। इस बढ़ती आधुनिकता और टेक्नोलॉजी के दौर में गौरैयों के लिए अपना अस्तित्व बचाए रखना एक चुनौती बन गई है। ऐसे में राकेश का गौरैयों के प्रति गहरा प्रेम और लगाव प्रकृति के लिए बेहतर कदम है।

राकेश नारियल की भूसी, कपास, जूट, रतन सहित अन्य सामग्रियों से घोंसलों का निर्माण करते हैं। अब तक राकेश देश भर के 3500 स्कूलों में घोंसले बनाने की कार्यशालाओं की मेजबानी कर चुके हैं। इन कार्यशालाओं के जरिए राकेश 1 लाख से अधिक बच्चों को घोंसला बनाना सिखा चुके है।

1980 के दशक से पहले दिल्ली में राकेश का घर गौरैयों की चहचहाहट ये गुंजायमान रहता था। उनके घर की छत पर कई घोंसले हुआ करते थे और उनका परिवार हर सुबह एक सुखद चहचहाहट से जागता था। मगर जब दिल्ली में औद्योगिक उछाल आया है, तब यहां से गौरैया धीरे-धीरे गायब होने लगीं।

इन सभी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए राकेश ने यह सुनिश्चित किया कि वह गौरैयों के लिए घोंसला बनाएंगे और उनके अस्तित्व को बचाए रखने लिए लगातार प्रयास करेंगे। वर्तमान में राकेश कई संस्थानों और एनजीओ के साथ मिलकर काम कर रहे है।

रिपोर्ट के अनुसार

राकेश के तैयार किए लगभग आधे मिलियन घोंसले पूरी तरह से पुनर्नवीनीकरण या बायोडिग्रेडेबल प्राकृतिक सामग्री से बने हैं। यह घोंसले ना सिर्फ गौरैयों के लिए सुरक्षित व बेहतर हैं बल्कि प्राकृतिक रूप से भी अच्छे हैं। राकेश की इस पहल से गौरैयों को अपना अस्तित्व बचाने में सहायता मिल रही है।

नेस्ट मैन खत्री कहते हैं...

गौरैया के लिए घर बनाने से बड़ा कोई आशीर्वाद नहीं है, जिसका घर हमने छीन लिया है। हमें प्रकृति की जरूरत है, लेकिन प्रकृति को हमारी जरूरत नहीं है। अगर हम जीना चाहते हैं और खुद को खुश रखना चाहते हैं, तो हमें प्रकृति के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है, क्योंकि वह हमें सबसे ज्यादा सपोर्ट करती है। एक दिन मैंने देखा कि मेरे दफ्तर के रास्ते में कुछ लोग उन पाइपों के छेदों को पक्का कर रहे है, जहां पक्षियों ने शरण ली थी। मैंने उनसे कहा कि मैं आपकी शिकायत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में करूंगा, तो वो तुरंत रुक गए।