
जयपुर।
लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम आने के बाद से कांग्रेस पार्टी सदमे में है। जयपुर से लेकर दिल्ली तक हार के कारणों पर मंथन किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष के इस्तीफे की बात हो या मुख्यमंत्रियों के बेटों को लड़वाने पर दबाव बनाने की बात पर राहुल गांधी की नाराज़गी। पार्टी की अंदरूनी राजनीति में पल-पल हलचलें तेज़ हो रही हैं। इस बीच राजस्थान कांग्रेस पार्टी के ही वरिष्ठतम सदस्य व पूर्व विधायक रामनारायण मीणा के एक ताज़ा बयान ने सभी को चौंका दिया है।गौरतलब है कि मीणा हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में कोटा-बूंदी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी थे। वे अपने प्रतिद्वंदी भाजपा के ओम बिड़ला से चुनाव हार गए हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामनारायण मीणा ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने का ज़िक्र करते हुए दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश की गहलोत सरकार को बर्खास्त करवा सकते हैं। मीणा ने यहां तक दावा किया कि पीएम मोदी जुलाई तक अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए गहलोत सरकार को भंग करवा सकते हैं। इस दावे के पीछे मीणा ने संविधान के अनुच्छेद 356 का हवाला दिया।
ये बोले रामनारायण मीणा
''साम-दाम-दंड भेद से वो सत्ता में आना चाहते हैं... उनका देश की मज़बूती से कोई लेना देना नहीं है... उनको तो खुद की मजबूती चाहिए.. विचारधारा की मजबूती चाहिए... मैं तो कांग्रेस के नेता हैं उनको सलाह देता हूँ... कि आप आपसी लड़ाई छोड़िये... आज मेरा जैसा व्यक्ति कार्यकारिणी का सदस्य भी नहीं है... तो देख लीजिये इससे राजस्थान की जनता के सामने क्या मैसेज जा रहा है... कांग्रेस की लीडरशिप जो स्टेट की है.. वो लीडरशिप अपने स्वार्थ को छोड़े.. और अभी भी राहुल गांधी के नेतृत्व में संगठित होने की बात करे... ईमानदारी से नेताओं और कार्यकर्ताओं को सेलेक्ट करे... तभी कांग्रेस बची रहेगी, नहीं तो नरेंद्र मोदी संविधान की धारा 356 के तहत इसी ताक में बैठे हैं कि वो राजस्थान की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं.. और यदि हम नहीं सुधरे तो जुलाई तक निश्चित तौर पर मोदीजी यहां दौरा करेंगे... इसे भंग करेंगे.. कॉन्स्टिट्यूशन प्रोविजन्स के तहत भंग करना चाहेंगे... क्योंकि उनको देश से कोई मतलब नहीं है, विकास से कोई मतलब नहीं है...''
रामनारायण मीणा के इस बयान और दावे में कितना दम है इसे जानने से पहले जान लेते हैं कि ये संविधान का अनुच्छेद 356 है क्या? क्या वाकई प्रधानमंत्री के पास ऐसी शक्तियां होती हैं कि वो किसी राज्य की सरकार को बर्खास्त करवा सके? सवाल ये भी कि अगर प्रधानमंत्री के पास ऐसी शक्ति है तो अब तक के इतिहास में किन-किन प्रधानमंत्रियों ने इस शक्ति का इस्तेमाल किया है? ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 356 से जुडी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों पर नज़र डालते हैं।
सवाल: क्या है संविधान का अनुच्छेद-356
जवाब: अनुच्छेद 356 दरअसल, आम बोलचाल की भाषा में राष्ट्रपति शासन होता है। ये केंद्र सरकार को किसी राज्य सरकार को बर्खास्त करने और राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुमति देता है। जब कभी राज्य का संवैधानिक तंत्र पूरी तरह विफल जाए तो उस अवस्था में केंद्र इस अनुच्छेद का इस्तेमाल कर सकता है। यह अनुच्छेद एक ऐसा ज़रिया है जो केंद्र सरकार को किसी नागरिक अशांति जैसे कि दंगे जिनसे निपटने में राज्य सरकार विफल रही हो की दशा में किसी राज्य सरकार पर अपना अधिकार स्थापित करने में सक्षम बनाता है।
सवाल: क्या अनुच्छेद-356 राज्य व्यवस्था के लिए खतरा है?
जवाब: राष्ट्रपति शासन के आलोचकों का तर्क है कि अधिकतर समय, इसे राज्य में राजनैतिक विरोधियों की सरकार को बर्खास्त करने के लिए एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए कुछ लोगों द्वारा इसे संघीय राज्य व्यवस्था के लिए एक खतरे के रूप में भी देखा जाता है। अनुच्छेद के उपयोग के कम और दुरुपयोग की ज्यादा आशंका जताई जाती है। ऐसे में ये बहस का विषय है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि अब तक के इतिहास को खंगाला जाए तो केन्द्र सरकारों ने समय-समय पर विपक्षी पार्टियों को परेशान करने के लिए इस अनुच्छेद का इस्तेमाल किया है।
सवाल: अब तक कितनी बार काम में लिया गया अनुच्छेद 356?
जवाब: 1950 में भारतीय संविधान के लागू होने के बाद से केन्द्र सरकार द्वारा इसका प्रयोग 100 से भी अधिक बार किया गया है। अनुच्छेद को पहली बार 31 जुलाई 1957 को लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई केरल की कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त करने के लिए किया गया था। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उत्तर प्रदेश की भाजपा की राज्य सरकार को भी बर्खास्त किया गया था।
सवाल: केंद्र के अनुच्छेद 356 इस्तेमाल के बाद राज्य में क्या स्थितियां बनती हैं?
जवाब: इस आर्टिकल के तहत राज्य सरकार को बर्खास्त कर दिया जाता है और राज्य के सत्ता की बागडोर राज्य सरकार की बजाय गवर्नर के पास चली जाती है। गौरतलब है कि गवर्नर की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है। अनुच्छेद 356 के लागू होने के बाद राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली हो जाती है और मंत्रीमंडल समूह भी कोई काम नहीं कर सकता।
... इधर कांग्रेस में 'उथल-पुथल' जारी
लोकसभा चुनाव में सभी 25 सीटें गंवाने के बाद से प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में जबरदस्त हलचल मची है। प्रदेश के नेताओं की बयानबाजी चरम पर है। सबसे पहले मंत्री लालचंद कटारिया का इस्तीफा वायरल हुआ तो दूसरे ही दिन मंत्री रमेश मीणा ने प्रदेश में नौकरशाही हावी होने का आरोप लगाते हुए सरकार पर हमला बोला था। मीणा के साथ उदयलाल आंजना का भी हार की जिम्मेदारी तय करने को लेकर बयान आया। वहीं सोशल मीणा पर अपने-अपने गुट के नेताओं के पक्ष में बयानबाजी चरम पर है।
Published on:
30 May 2019 12:34 pm

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