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हमारी औसत उम्र दो साल बढ़कर हुई 69.7 वर्ष

जीवन प्रत्याशाः दिल्ली टॉप पर तो छत्तीसगढ़ सबसे पीछे

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जयपुर

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Aryan Sharma

Jun 14, 2022

हमारी औसत उम्र दो साल बढ़कर हुई 69.7 वर्ष

हमारी औसत उम्र दो साल बढ़कर हुई 69.7 वर्ष

नई दिल्ली. भारतीयों की औसत आयु अब दो साल बढ़कर 69.7 वर्ष हो गई है। हालांकि यह अभी भी वैश्विक औसत जीवन प्रत्याशा (जीवन काल) 72.6 वर्ष से कम है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के अनुसार जीवन प्रत्याशा में दो साल की वृद्धि होने में 10 वर्ष लग गए। हालांकि जीवन प्रत्याशा को तेजी से आगे बढ़ाने में शिशु और नवजात मृत्यु दर में कमी भी एक बड़ी वजह है। सर्वाधिक जीवन प्रत्याशा देश की राजधानी में 75.9 वर्ष और सबसे कम छत्तीसगढ़ में 65.3 वर्ष दर्ज की गई। वर्ष 1970-75 में भारत की जीवन प्रत्याशा 49.7 थी, जो वर्ष 2015-2019 में 69.7 हो गई यानी 45 वर्षों के अंतराल में औसत आयु 20 वर्ष बढ़ी।

शिशु मृत्यु दर घटने से पड़ा सकारात्मक प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार जन्म के समय और एक या पांच वर्ष की आयु में जीवन प्रत्याशा का अंतर उन राज्यों में सर्वाधिक है, जहां उच्च शिशु मृत्यु दर ज्यादा है जैसे- मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश, ऐसा राज्य है, जहां शिशु मृत्यु दर (38) दूसरे नंबर पर है। यहां जैसे ही एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई, जीवन प्रत्याशा में 3.4 वर्षों की वृद्धि हो गई। इसी तरह मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर (43) सर्वाधिक है, यहां भी बच्चों ने जब एक वर्ष की आयु पूरी की तो जीवन प्रत्याशा में 2.7 वर्षों का इजाफा हो गया।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रत्याशा में बढ़ा अंतर
वर्ष 2015-19 के लिए गांवों में जीवन प्रत्याशा 68.3 वर्ष और शहरों में 73.0 वर्ष रही। इसी तरह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में क्रमश: 0.3 वर्ष और 0.4 वर्ष की वृद्धि हुई है। भारत में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जीवन प्रत्याशा में बड़ा अंतर है। जैसे हिमाचल प्रदेश में शहरी महिलाओं की जीवन प्रत्याशा सबसे अधिक 82.3 वर्ष है, जबकि छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पुरुषों की सबसे कम केवल 62.8 वर्ष है। असम में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जीवन प्रत्याशा में लगभग आठ वर्ष का अंतर है। इसके बाद पांच वर्ष का अंतर हिमाचल प्रदेश में है। केरल एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां ग्रामीण जीवन प्रत्याशा पुरुषों और महिलाओं, दोनों की शहर से अधिक है।

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