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15 प्रतिशत तक लागत बचाएंगे उद्योग, चार गैस आधारित जोन तय

औद्योगिक विकास प्रदेश में विनिर्माण में बचत की तुरुप बनेगा गैस ग्रिड, महंगी बिजली अब नहीं रहेगी उद्योगों की बाधा
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जयपुर। प्रदेश की औद्योगिक विकास संभावनाओं की कमर तोड़ रही महंगी बिजली की बाधा अब जल्द दूर होगी। राज्य सरकार ने पेट्रोलियम नेचुरल गैस ग्रिड के तहत सस्ती ऊर्जा को निवेश का तुरुप बनाने की तैयारी कर ली है। सरकार के आकलन के अनुसार मेहसाणा-बठिंडा पाइप लाइन से मिलने वाली गैस उच्च ऊर्जा खपत वाले उद्योगों की विनिर्माण लागत को 5 से 15 प्रतिशत तक कम कर देगी।

इसी पर रीको ने गैस ग्रिड के दायरे में आ रहे चित्तौडगढ़़, अजमेर, जालौर और भीलवाड़ा जिलों में पूर्णत: गैस आधारित उद्योगों के लिए चार डेडिकेटेड औद्योगिक क्षेत्र तय कर लिए हैं। ये क्षेत्र प्रमुखत: ग्लास, सिरेमिक और स्टील संबंधी इकाइयों के निवेश का ठिकाना बनेंगे। इन चार जिलों समेत राजस्थान के 18 जिलों के लिए केन्द्र की चयनित कंपनियों ने काम शुरू कर दिया है। शेष की प्रक्रिया चल रही है।

1400 करोड़ के चार गैस आधारित क्षेत्र
रीको ने गैस लाइन के दायरे में आने वाले जिलों में चार पूर्णत: गैस आधारित विशेष औद्योगिक क्षेत्रों का विकास शुरु किया है। 1400 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत के साथ चारों की प्रशासनिक स्वीकृति सरकार ने जारी की है। इनमें सिरेमिक, खाद्य प्रसंस्करण, ग्लास, मिनरल्स और मेटल रिसाइकिलिंग सेक्टर के उद्योग संभावित निवेशक हैं।

साझा योजना की तैयारी

औद्योगिक विकास के लिए सरकार और कंपनियों का साझा एकीकृत प्लान तैयार करने को रीको ने जीआइजीएल व शहरों में गैस आपूर्ति के लिए चयनित कंपनियों के साथ बातचीत की है।

अब पैदा भी करेंगे, कमाएंगे भी
गैस ग्रिड से आपूर्ति जल्द शुरू हुई तो यह खासतौर पर हाई पावर कंजम्पशन श्रेणी के उद्योगों के लिहाज से प्रदेश के लिए वरदान होगी। फिलहाल सिरेमिक, ग्लास जैसे ताप आधारित उद्योग हमारे यहां महंगी बिजली के चलते ही आकर्षित नहीं होते। फेल्सपार, सिलिका जैसे खनिज के सबसे बड़े उत्पादक होने के बाद भी सिरेमिक इंडस्ट्री गुजरात चली जाती है। अन्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में भी ऐसा ही है। बिजली का सस्ता विकल्प मिलने पर यह दंश दूर होगा।

राजस्थान में गैस ग्रिड एक नजर में
— जीआइजीएल की मेहसाना-बठिंडा गैस पाइपलाइन प्रदेश के सिरोही, जालौर, बाड़मेर, पाली, अजमेर, जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, चूरू और हनुमानगढ़ से गुजर रही है। इसी साल के अंत तक पूरी लाइन बन जाने की संभावना है।
— ऐसे ही गेल की मुख्य लाइन नीमराणा और कोटा में फिलहाल आपूर्ति चल रही है।
— केन्द्र का पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड निविदा प्रक्रिया में 8 कंपनियों को अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भीलवाड़ा, चित्तौडगढ़़, धौलपुर, डूंगरपुर, जयपुर, जैसलमेर, बूंदी, जालौर, जोधपुर, राजसमंद, कोटा, पाली व सिरोही में इन लाइनों के जरिए आपूर्ति के लिए क्षेत्र आवंटित कर चुका है।
— बीकानेर, चूरू, दौसा, हनुमानगढ़, झुंझुनूं, टोंक, करौली, नागौर, सवाई माधोपुर, सीकर और श्रीगंगानगर अगले चरण की निविदा में प्रस्तावित हैं।
— भरतपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़ और उदयपुर पर फैसला बाकी है।

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