
राजस्थान में तेजी से बदलने लगी है औद्योगिक तस्वीर
अतिरिक्तमुख्य सचिव उद्योग डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि कहा कि प्रदेश में लगभग सभी बड़े सेक्टरों में औद्योगिक उत्पादन शुरु हो गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों व सहभागिता से औद्योगिक गतिविधियां पटरी पर आने लगी है। एसीएस डॉ. अग्रवाल ने लॉक डाउन के कारण परिस्थितियों में बदलाव आया है। उन्होंने अधिकारियों को उद्यमियों के विश्वास पैदा करने, सरकारी पैकेजों का लाभ दिलाने में सहयोग करने और उनसे संवाद कायम रखते हुए प्रदेश के औद्योगिक सिनेरियों और अधिक बेहतर बनाने के समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए उद्योगों और बाहर से आने वाले स्थानीय श्रमिकों के बीच समन्वय बनाने के निर्देश दिए। इससे स्थानीय श्रमिकों को यहां ही रोजगार मिल सकेगा।
रीको के प्रबंध संचालक आशुतोष पेडनेकर ने बताया कि रीको औद्योगिक क्षेत्रों में 45 फीसदी इकाइयों ने 28 फीसदी श्रमिकों के साथ उत्पादन कार्य शुरु कर दिया है। उन्होंने रीको अधिकारियों को निर्देश दिए कि औद्योगिक इकाइयों को आत्म निर्भर भारत पैकेज, रिप्स पैकेज सहित, रीको व अन्य वित्तदायी संस्थाओं द्वारा जारी पैकेज की जानकारी और लाभ दिलाने में सहयोग करे।
अग्रवाल ने राज्य में 80 प्रतिशत से अधिक 547 में से 440 वृहदाकार इकाइयों ने उत्पादन शुरु हो गया है। वहीं करीब 30 फीसदी एमएसएमई इकाइयां उत्पादन कार्य में लग गई है। उन्होंने बताया कि जापानी जोन में भी 45 में से 38 इकाइयों में उत्पादन होने लगा है।आयुक्त अग्रवाल ने बताया कि बाजार में मांग बढऩे के साथ ही मेगा व वृहदाकार इकाइयों में उत्पादन बढ़ेगा और इसके साथ ही इनसे जुड़ी एमएसएमई इकाइयों में तेजी से मांग क्रियेट होगाी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पैकेज का सूक्ष्म अध्ययन करे और उद्योगों व वित्तदायी संस्थाओं के बीच सेतु का काम करते हुए प्रदेश के उद्योगों के लिए सहयोगी की भूमिका निभाए।बैठक में जीएम डीआईसी व रीको अधिकारियों ने श्रमिकों, लिक्विडिटी, बिजली की फिक्स रेट, किसान क्रेडिट कार्ड की तरह एमएसएमई क्रेडिट कार्ड, रिप्स में पुरानी यूनिटों की भी लाभ दिलाने जैसे सुझाव दिए।
Published on:
03 Jun 2020 09:48 pm
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