5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इंफ्रास्ट्रक्चर में गड़बड़ी… अब ‘मौके पर एक्शन’, सभी बड़े प्रोजेक्ट दायरे में

प्रदेश के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में क्वालिटी में गड़बड़ी के मामलों में अब मौके पर ही जवाबदेही तय होगी। बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों के बाद सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव खुद मोर्चा संभाल रहे हैं।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

GAURAV JAIN

Jan 04, 2026

क्वालिटी पर जीरो टॉलरेंस : 31 मार्च तक चलेगा विशेष निरीक्षण अभियान

सीएम के निर्देश पर मौके पर जांच और कार्रवाई, गड़बड़ी पर तय होगी जवाबदेही

जयपुर. प्रदेश के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में क्वालिटी में गड़बड़ी के मामलों में अब मौके पर ही जवाबदेही तय होगी। बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों के बाद सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव खुद मोर्चा संभाल रहे हैं।

इसके लिए अब 31 मार्च तक प्रदेशभर में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। गुणवत्ता, मानक और समय-सीमा में चूक पर अफसरों और एजेंसियों पर सीधी कार्रवाई होगी। सीएस ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

छह विभागों के विकास कार्य जांच के दायरे में

अभियान के दायरे में नगरीय विकास, पीडब्ल्यूडी, पीएचईडी, ऊर्जा, जल संसाधन और ग्रामीण विकास विभाग आएंगे। इनके निर्माणाधीन और हाल ही पूरे हुए कार्यों की मौके पर ही जांच होगी। प्रदेश में सड़क, फ्लाइओवर, आरओबी-आरयूबी, ड्रेनेज और सीवरेज जैसे कुछ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सीएम पहले भी गुणवत्ता को लेकर सख्ती दिखा चुके हैं।

मौके पर जांच ही नहीं, लिखित में देनी होगी इंस्पेक्शन रिपोर्ट

आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि निरीक्षण सिर्फ औपचारिक नहीं होगा। अफसरों को मौके पर जाकर जांच करनी होगी और इसकी लिखित रिपोर्ट अनिवार्य रूप से तैयार करनी होगी। रिपोर्ट में कमियां, जिम्मेदार अधिकारी-एजेंसी और सुधार के लिए एक्शन लेने की जानकारी देनी होगी।

मुख्य फोकस

-निर्माण कार्य और सामग्री की गुणवत्ता

-तय मानकों की पालना हो रही है या नहीं और प्रोजेक्ट की तय समय-सीमा

-स्वीकृत डिजाइन, स्पेसिफिकेशन और मापदंडों की पालना

-कमी मिलने पर तत्काल उसे सुधारना

मौके पर जांच पर इंस्पेक्शन रिपोर्ट ही नहीं, इसलिए जिम्मेदार बच रहे

जयपुर सहित सभी छोटे-बड़े शहरों में नियमित मॉनिटरिंग का काम कनिष्ठ अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता के पास ही रहता है। अधीक्षण अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद वे सक्रिय नहीं हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण तक में ऐसे ही हालात हैं। यहां जिम्मेदार अधिकारी कभी-कभार मौके पर जाते तो हैं, लेकिन उसकी लिखित में इंस्पेक्शन रिपोर्ट नियमित नहीं बनाई जाती है। अभियंताओं और एजेंसियों को आंख दिखाने तक मामला सीमित रहता है। जबकि, पहले इंस्पेक्शन रिपोर्ट तैयार होती रही, जिससे कार्य की वास्तविक स्थिति रिकॉर्ड में रहती थी और मिलीभगत होने की आशंका कम होती थी।