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ऐसा अनोखा देश, जहां नागरिकों को पैदल चलने के मिलते हैं पैसे, जानें और भी खास बातें

सिंगापुर अचानक ही देश—दुनिया के राजनीतिक नक्शे पर चर्चा का केंद्र बनकर उभरा है।

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सिंगापुर से लौटकर चक्रेश महोबिया
जयपुर। सिंगापुर अचानक ही देश—दुनिया के राजनीतिक नक्शे पर चर्चा का केंद्र बनकर उभरा है। इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा का अगला पड़ाव सिंगापुर है। अमरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी हां और ना के बीच जून में सिंगापुर आएंगे। दरअसल आत्मविश्वास और कठिन मेहनत के बलबूते सिंगापुर अंतराष्ट्रीय व्यापार का केंद्र बन चुका है। एक देश, एक शहर जिसके पास न तो प्राकृतिक संसाधन हैं ना ही निर्यात के लिए किसी तरह का उत्पादन। इसके बावजूद हर अंतरराष्ट्रीय कंपनी का कार्यालय यहां है। और सिंगापुर का ध्यान इन दिनों पर्यटन पर केंद्रित है। देश की कुल अर्थव्यवस्था का 7 फीसदी बजट पर्यटन उद्योग ही है।

दरअसल सिंगापुर एक ऐसा देश है, जिसने खुद को एस्सेल वल्र्ड में बदल डाला। पर्यटकों के लिए हर चार कदम पर एक अजूबा रच डाला है। बेहद सीमित जमीन के एक— एक इंच का उपयोग किया। गरीबी, बेरोजगारी और उपेक्षा का दंश झेलते सिंगापुर की बेहिसाब कामयाबी का राज बेहद सीधा है— देश का सामूहिक आत्मसम्मान और अथक मेहनत..।

9 अगस्त 1965 को जब सिंगापुर आजाद हुआ तो न लोगों के पास घर थे, ना ही रोजगार। छोटे— छोटे द्ववीपों से मिलकर बना यह देश उन दिनों गैंगस्टर्स का अड्डा हुआ करता था।

थोड़ा इतिहास खंगालें तो पाएंगे कि मलेशिया ने इसे बिना अवसरों की जमीन मानकर खुद से अलग कर फेंका था। सालों साल राशन और सब्जी से लेकर पीने का पानी तक मलेशिया और दूसरे पड़ोसी देशों की रहम पर चलता रहा। आज पूरी तरह आत्मनिर्भर है और मलेशिया को कई तरह की मदद उपलब्ध कराता है।

नाउम्मीदी के इस देश ने अपमान से उबरने के लिए तब जो संकल्प लिया, उसका प्रतिफल पूरी दुनिया के सामने है। दरअसल सिंगापुर के पहले प्रधानमंत्री ली क्वान यू ने तब तय किया कि हम दुनिया के आगे मदद का हाथ नहीं फैलाएंगे। जो हैं, जैसे भी हैं— खुद को सफलतम बनाकर दिखा देंगे।

मलय, चाइना, इंडोनेशिया और भारत की मिश्रित संस्कृति वाले इस देश के नागरिक हर पर्यटक को अपने फॉदर आॅफ नेशन ली क्वान यू और अपने देश के आत्मनिर्भर होने के इतिहास के बारे में सगर्व से चर्चा करते हैं। अपने पूर्वजों के अथक त्याग, मेहनत के साथ कैसे एक राष्ट्रीय चरित्र के साथ विकास की गाथा लिखी गई, किसी भी सिंगापुरियन से पूछा जा सकता है।

एक देश कैसे नागरिक अधिकार और कर्तव्यों के सख्त पालन से महान बन सकता है, सिंगापुर इसका बेहतरीन उदाहरण है।

भरोसा करना मुश्किल है कि सरकारें अपने लोगों के स्वास्थ्य और सेवा के प्रति इतनी गंभीर भी हो सकती हैं। मगर सिंगापुर सरकार अपने लोगों के स्वास्थ्य के प्रति इतनी गंभीर है कि वहां लोगों को पैदल चलने के लिए पैसा दिया जाता है।

एक एप के माध्यम से इसकी ट्रेकिंग होती है। रोजाना 10 किमी चलने पर हर सप्ताह 20 डॉलर यहां के लोगों के खाते में आते हैं। अगर यह दूरी इससे ज्यादा होती है तो हर माह 40 डॉलर अतिरिक्त भी मिलते हैं।

— सिंगापुर में वाहन खरीदना बेहद महंगा सौदा है। यहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रात्साहित किया जाता है। दुनिया की पहली मैट्रो ट्रेन सिंगापुर में ही आई थी। आज मैट्रो ट्रेन, मोनो ट्रेन और पब्लिक बस सर्विस सब कुछ मौजूद है। नागरिकों के लिए मैट्रो और मोनो ट्रेन मुफ्त हैं। हर पांच से 10 मिनट की दूरी पर रेलवे स्टेशन हैं। आॅफिस के लिए अगर आप ट्रेन से सुबह जल्दी जाएंगे तो आपको बोनस मिलेगा।

— सिंगापुर में प्रकृति को बेहद महत्व दिया जाता है। हर सरकारी और निजी परिसर में एक बड़ा क्षेत्रफल सिर्फ हरियाली के लिए ही आरक्षित है। यही कारण है कि पूरे सिंगापुर में हर जगह हरियाली नजर आती है।

— सिंगापुर में जमीन की बेहद कमी है। इसलिए यह देश वर्टिकली निर्माण को ज्यादा महत्व देता है। कई निर्माण 17 मंजिल तक जमीन के भीतर हैं तो आकाशीय निर्माणों की संख्या ही बेहिसाब है।