
25 लाख कुशल, अकुशल मजदूरों का डेटा तैयार, जरूरत होगी तो काम में लेंगे— पवन
जयपुर. लॉकडाउन में प्रदेश से मजदूरों का पलायन उद्योगों के लिए बड़ा संकट है, लेकिन इस संकट के बीच सरकार वैकल्पिक उपायों पर तेजी से आगे बढ़ती दिख रही है। राहत की खबर श्रम विभाग से आई है, जहां सरकार ने राजस्थान के मूल निवासी 23 लाख अकुशल और 2 लाख कुशल मजदूरों को डेटा तैयार किया है। श्रम सचिव नीरज के.पवन ने दावा किया है कि यह शुद्ध और सत्यापित डेटा मौजूद है, यदि आवश्यकता पड़ती है तो इसे काम में लेेगी। इसके अलावा कारखानों में काम के घंटे भी 8 से बढ़ा कर 12 कर दिए हैं, ताकि कम श्रमिकों में भी उत्पादकता प्रभावित नहीं हो। श्रमिकों संबंधी समस्या और उद्योगों को लेकर राजस्थान पत्रिका ने नीरज से बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख सवाल—जवाब...
श्रमिकों के कमी की समस्या से जूझने की क्या तैयारी है ?
— यही सही है कि हजारों, लाखों की संख्या में मजदूरों का पलायन हुआ है। इसके लिए हमने आरएसएलडीसी से विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त करीब दो लाख कुशल श्रमिकों का डेटा तैयार किया है। इसे उद्योग आयुक्त को भेजा गया है। यदि जरूरत होगी तो सरकार इसे काम में ले सकती है। ये पलायन कर गए श्रमिकों का स्थान ले सकते हैं।
क्या प्रदेश में मजदूरों की आवश्यकता को देखते हुए यह संख्या कम नहीं ?
— अभी हम सिर्फ कुशल मजदूरों की बात कर रहे हैं, जो प्रशिक्षित हैं। इनके लिए हमने आईटीआई और रोजगार कार्यालयों से भी पंजीकृत बेरोजगारों का डेटा एकत्र किया है। यह सूची भी क्षेत्रवार उद्योगों को दी जाएगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर हर क्षेत्र के हिसाब से उद्योग अपनी आवश्यकता के अनुसार की रोजगार की जरूरत वाले लोगों से बातचीत की जा सके।
बहुत बड़ी संख्या में मजदूरी करने वाले अकुशल श्रमिकों की किल्ल्त तो फिर भी रहेगी ?
— ये मजदूरों का वह तबका है, जो प्रशिक्षित नहीं। लेकिन मनरेगा का डेटा इसका बड़ा स्रोत हो सकता है। फिर भी हमारे पास भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण मंडल में पंजीकृत 23.44 लाख मजदूरों को डेटा तैयार है।
लेकिन यह कैसे पता चलेगा कि यह मजदूर राजस्थान में है ?
— ये सभी 23.44 लाख मजदूर राजस्थान के ही मूल निवासी है, इसलिए यहीं उपलब्ध होंगे। हाल ही हमने इन सभी के खातों में ढ़ाई—ढ़ाई हजार रुपए की सहायता राशि दी है। इसकी योग्यता ही यही थी कि वह राज्य का निवासी होना चाहिए। यह बिल्कुल शुद्ध डेटा है, जिसे जरूरत होने पर काम लिया जा सकता है।
Updated on:
05 May 2020 07:39 am
Published on:
05 May 2020 07:00 am
