
'इन्वेस्ट राजस्थान ' सिर पर आया, केन्द्र में अब भी अटके हैं राज्य के कई ड्रीम प्रोजेक्ट
पंकज चतुर्वेदी
जयपुर. प्रदेश में निवेश बढ़ोतरी के लिए अक्टूबर में होने जा रहा इन्वेस्ट राजस्थान समिट अब सिर पर है, लेकिन प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार के कई ड्रीम प्रोजेक्ट केन्द्र सरकार के पाले में जाकर अटक गए हैं। पचपदरा रिफाइनरी के समीप पेट्रोलियम, केमिकल एवं पेट्रोकेमिकल इन्वेस्टमेंट रीजन (पीसीपीआइआर), कांकाणी का टैक्सटाइल पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स पर बीते कई महीनों से केन्द्र- राज्य के बीच जारी बातचीत और कागजी औपचारिकताओं की पूर्ति के बावजूद केन्द्र से कोई अंतिम नतीजा नहीं निकल पा रहा। ये ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स हैं, जो यदि मूर्त रूप लेते हैं तो इनके प्रति निवेशकों को आकर्षित किया जा सकता है।
पीसीपीआइआर
क्या है प्रोजेक्ट
पचपदरा रिफायनरी के समीप पेट्रोलियम सह उत्पाद आधारित उद्योग लगाने के लिए राज्य ने 353 वर्ग किलोमीटर में यह परियोजना बनाई है। इसमें करीब 11 हजार करोड़ की लागत और एक लाख से अधिक रोजगार पैदा होने का आकलन है।
अब तक क्या
पीसीपीआइआर के तहत रीको ने पचपदरा के बोरावास कलावा और रामनगर थोब, दो औद्योगिक क्षेत्रों का विकास शुरू किया है। केन्द्र की पीसीपीआइआर पॉलिसी के तहत हिस्सेदारी के लिए जून, 2021 में औपचारिक प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा जा चुका है।
कहां अटका मामला
राज्य नई दिल्ली में अपना प्रजेन्टेशन दे चुका। अब केन्द्र की आर्थिक मामलात की केबिनेट समिति विचार करेगी और फिर केंद्र से अधिसूचना जारी होगी।
कांकाणी मेगा टैक्सटाइल पार्क
क्या है प्रोजेक्ट
वस्त्र मंत्रालय ने पीएम मित्रा मेगा टैक्सटाइल पार्क योजना तहत देशभर में 7 पार्क बनाने के लिए राज्यों से प्रस्ताव मांगे। जोधपुर के कांकाणी में एक पार्क का प्रस्ताव बना कर राजस्थान ने जुलाई, 2021 में केन्द्र को भेज दिया था। यदि मंजूर हुआ तो पार्क विकास के लिए केन्द्र 500 करोड़ रुपए देगा।
अब तक क्या
राज्य सरकार कांकाणी में करीब एक हजार एकड़ भूमि तैयार कर चुकी। वस्त्र मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता वाली केन्द्रीय टीम ने इसके लिए कांकाणी का दौरा कर मौका देख लिया। हमारे अधिकारी भी नई दिल्ली में प्रेजेन्टेशन दे चुके।
कहां अटका मामला
पूरे देश में सात पार्क के लिए राजस्थान के अलावा 12 अन्य राज्यों से प्रस्ताव भेजे हैं। अब तक कौनसे सात राज्यों को मंजूरी मिलेगी, इसका फैसला केन्द्र से नहीं हुआ। हालांकि केन्द्र की मंजूरी नहीं मिलती है, तब भी राज्य इसे विकसित करेगा।
एनसीजेड में रियायत
क्या है प्रकरण
राज्य बजटों में घोषित अलवर, भरतपुर के करीब दर्जन भर नए औद्योगिक क्षेत्रों के लिए चिह्नित 2600 हेक्टेयर भूमि एनसीआर रीजनल प्लान के प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र (एनसीजेड) में आ गई है। पेंच के चलते इन दोनों जिलों में कोई भी नई औद्योगिक इकाइ लगने में संकट आ गया है।
अब तक क्या
राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास अवरुद्ध होने का हवाला देते हुए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के नए रीजनल प्लान- 2041 में राज्य के प्राकृतिक क्षेत्र में कमी करने का प्रस्ताव भेजा है।
कहां अटका मामला
एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने नए रीजनल प्लान के लिए प्रारूप तो जारी कर दिया है। लेकिन कई माह बीतने के बाद भी अंतिम तौर पर प्लान को मंजूरी नहीं दी है। ऐसे में नए औद्योगिक क्षेत्रों पर कोई फैसला नहीं हो पा रहा।
Published on:
21 Aug 2022 08:41 pm
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