
IPS Preeti Chandra Exclusive : जयपुर कमिश्नरेट में एडिशनल सीपी ट्रैफिक आईपीएस प्रीति चंद्रा ने राजस्थान पत्रिका के स्पेशल एडिशन संडे गेस्ट एडिटर में अपने जीवन के संघर्ष और जयपुर ट्रैफिक व्यवस्था पर खुलकर बात की। प्रीति चंद्रा 2008 बैच की आईपीएस है। उन्होने बताया कि कैसे उन्होने आईपीएस तक सफर पूरा किया। उन्होने कहा कि उभरते शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में आम आदमी को स्वयं का अनुशासन और ट्रैफिक सेंस बहुत जरूरी है। साथ ही प्रीति चंद्रा ने कहा कि मां-बाप वाकई अपने बच्चों से प्यार करते है तो उन्हें 18 साल तक होने तक व्हीकल चलाने को नही दें।
आईपीएस प्रीति चंद्रा ने अपने जीवन के संघर्षों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मेरा जन्म सीकर के गांव कुदन में हुआ, माता-पिता ने हमेशा आगे बढ़ाया। जयपुर के महारानी कॉलेज से पढ़ी, फिर शिक्षा के क्षेत्र में आ गई। सरकारी लैक्चरर भी रही, लेकिन हमेशा से सिविल सेवा की चाह थी, पहले ही प्रयास में सफलता मिल गई। उसके बाद शुरू हुई यात्रा। इस दौरान विभिन्न जिलों में काम करने का मौका मिला, चुनौती यह रही कि आज भी 10 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो महिला अधिकारियों को गंभीरता से नहीं लेते।
जयपुर कमिश्नरेट में एडिशनल सीपी ट्रैफिक आईपीएस प्रीति चंद्रा ने ट्रैफिक व्यवस्था के बारे में बताते हुए कहा कि सरकारी संसाधन सीमित हैं और टैक्सी, डिलीवरी सहित अन्य टाइम बाउंड सर्विसेज तेजी से बढ़ रही हैं। व्हीकल बढ़ने से पार्किंग का लोड बढ़ रहा है। पार्किंग के कारण सड़कें सिकुड़ रही हैं और अव्यवस्थित थड़ी-ठेलों ने पार्किंग स्पेस को खत्म कर दिया है।
उन्होने कहा कि यातायात हर आम आदमी की सुविधा है, ऐसे में स्वयं का अनुशासन और ट्रैफिक सेंस बहुत जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति यदि वाहन चलाने या पार्किंग करते समय यातायात संबंधी जागरूकता रखेगा तो शहरों की सूरत जरूर बदलेगी। माता-पिता की भूमिका इसमें अहम है, यदि वे बच्चों से वाकई में प्यार करते हैं, तो उन्हें 18 साल तक होने तक व्हीकल चलाने को नही दें।
Published on:
25 Feb 2024 04:42 pm
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