अजमेर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन आयुक्त गिरधर बेनीवाल और नवगठित गंगापुर जिले के तत्कालीन विशेषाधिकारी आईपीएस सुशील को सरकार ने 13 जून को किया था निलम्बित।
जयपुर. निलम्बित आईपीएस सुशील कुमार विश्नोई और आईएएस गिरधर के खिलाफ विभागीय जांच रिपोर्ट पेश होने के बाद सरकार ने शुक्रवार को दोनों को बहाल कर दिया। जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि दोनों अधिकारी जानबूझ कर घटना स्थल पर दुबारा पहुंचे थे। उनके मारपीट में शामिल होने के तथ्य भी आए थे।
आईपीएस सुशील कुमार विश्नोई और आईएएस गिरधर अपने मित्रों के साथ 11 जून को देर रात अजमेर के गेगल थाना क्षेत्र स्थित एक रेस्टोरेंट में गए थे। मित्रों में अधिकतर सरकारी कर्मचारी व अधिकारी थे। वहां होटल कर्मचारियों से विवाद हो गया। विवाद होने के बाद दूसरा पक्ष भारी पड़ा तो वे अपने वाहन लेकर वहां से चले गए। इसके बाद दोनों अधिकारी अपने मित्रों के साथ वापस लौटे थे, जहां मारपीट की घटना हुई थी।
पहले दो दिन मामला अजमेर पुलिस ने दबाए रखा। राज्य सरकार की जानकारी में आने पर तेरह जून को घटना में शामिल सुशील कुमार, गिरधर व अन्य कर्मचारियों को निलम्बित कर दिया गया था। अधिकारियों को निलम्बित करने के साथ ही विभागीय जांच शुरू की गई, जिसका जिम्मा डीआईजी रामेश्वर सिंह को दिया गया था। विभागीय जांच में सुशील कुमार व गिरधर के साथ अन्य कर्मचारियों ने भी अपना पक्ष रखा है। तय समय के मुताबिक जांच अधिकारी ने पहले अन्तरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। इसके बाद गत सप्ताह पूर्ण रिपोर्ट भी पेश कर दी।
इस घटनाक्रम को लेकर दर्ज एफआईआर की जांच गेगल थाने से सीआईडी में स्थानांतरित की जा चुकी है। यह जांच अभी जारी है। यह जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोवर्धन सौंकरिया कर रहे हैं। जांच में अभी रेस्टोरेंट कर्मचारियों के बयान हुए हैं। आरोपित अधिकारी व कर्मचारियों के बयान अभी होने बाकी हैं।