
खाड़ी देशों में प्रवासी राजस्थानी (फोटो-पत्रिका)
जयपुर। हवा में उड़ते आग के गोले, रद्द होती फ्लाइट्स और छंटनी की आहट..। ईरान-इजरायल युद्ध की चिंगारी ने खाड़ी देशों में रह रहे 90 लाख भारतीयों की रातों की नींद उड़ा दी है। बांसवाड़ा, झुंझुनूं और नागौर के हजारों युवा युद्ध के मुहाने पर खड़े होकर वतन लौटने की जद्दोजहद कर रहे हैं। कोई तीन गुना किराया देकर घर पहुंच रहा है, तो कोई तेल के कुओं पर सन्नाटे के बीच अपनी नौकरी बचाने की कोशिश कर रहा है।
कुवैत में एयरपोर्ट बंद होने की वजह से वहां काम करने वाले भारतीय कामगारों को बस मार्ग से सऊदी अरब पहुंचाया जा रहा हैं। यहां से वे फ्लाइट से आ रहे हैं। जयपुर से कुवैत की फ्लाइट निरस्त है। कुवैत की गल्फ नेशनल ड्रिलिंग कंपनी में काम करने वाले सुरेश कुमार योगी ने बताया कि उनकी 1 अप्रेल को कुवैत जाने वाली फ्लाइट की टिकट कैंसिल हो गई है।
एक तेल कंपनी में रिंग मैनेजर कोटपूतली-बहरोड़ जिले के विराटनगर निवासी अंकित योगी ने कुवैत से फोन पर बताया कि तनाव की वजह से तेल कंपनियों ने प्रोडेक्शन कम कर दिया है। कुवैत में 30 फीसदी तेल कुओं में उत्पादन बंद है।
अमरीका के सैन्य बेस होने के कारण बहरीन, कुवैत, कतर, यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन, इराक, ओमान, तुर्की, सीरिया सीधे तौर पर प्रभावित हैं। खाड़ी देशों के भारतीय कामगारों के लिए रोजगार का संकट बढ़ेगा। खाड़ी देशों में करीब 90 लाख भारतीय कामगार हैं।
नागौर निवासी आइटी इंजीनियर समीर गौरी ने पत्रिका को बताया कि कतर के शहरों में सामान्य जनजीवन शांत है, लेकिन तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में होटल पर काम करने वाले नागौर जिले के धारणा गांव निवासी लक्ष्मण फरड़ौदा ने बताया कि वहां हालात सामान्य हैं।
झुंझुनूं जिले के पचलंगी निवासी हमीद मोहम्मद, जो सऊदी अरब के जॉर्डन के तुरैफ एयरपोर्ट पर चालक के रूप में कार्यरत है। पिछले 45 दिनों से भारत लौटने का प्रयास कर रहा था। भारत लौटने के लिए उसे चार फ्लाइट बदलनी पड़ी। सऊदी अरब में भारत लौटना चाहने वाले लोगों को टिकट मिलने में भारी परेशानी हो रही है।
बिसाऊ के सलीम खान दुबई घूमने गया थे, लेकिन वहां हुए मिसाइल व ड्रोन हमलों के कारण 10 दिन तक संकट में फंस गए। आखिरकार ज्यादा किराया देकर वह भारत लौट सका तो परिजनों ने राहत की सांस ली।
कतर के दोहा में एक कम्पनी में प्रबंध संचालक के रूप में कार्यरत झुंझुनूं जिले के विक्रम मिश्रा ने फोन पर हालात बयां करते हुए कहा कि बचपन में रामायण सीरियल में जो दृश्य देखते थे। आसमान में उड़ते तीरों का टकराना और आग का गोला बनना, वैसे ही दृश्य अब हकीकत में सामने देखने को मिल रहे हैं। कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम की रफ्तार धीमी हो गई है। काम कम होने और छंटनी की आशंका से शेखावाटी के लोगों के बीच डर का माहौल है।
Updated on:
25 Mar 2026 10:43 pm
Published on:
26 Mar 2026 06:00 am
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