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नहीं रहे हमारे Irrfan Khan, रो रहा है जयपुर रंगमंच

मुंबई में बॉलीवुड एक्टर इरफान खान के निधन से फिल्म जगत ही नहीं बल्कि जयपुर का हर रंगकर्मी रो रहा है।

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नहीं रहे हमारे Irrfan Khan, रो रहा है जयपुर रंगमंच

जयपुर में युवाओं में रंगमंच का रोग लगाने वाले इरफान खान नहीं रहे। फोटो में जयपुर के कलाकारों के साथ दिल्ली में इरफान खान

सुरेंद्र बगवाड़ा, जयपुर

मानो या ना मानो ( Mano ya na mano ) , जयपुर को रंगमंच का रोग लगाने वाले, अपनी बातों में पजल खेलने वाले और जयपुर के रंगमंच का मुस्कुराहता चेहरा, अपनी नॉक आउट ( Knock Out ) पारी खेलते—खेलते शांत हो गया। अपने घर जयपुर के प्रति उनका लगाव और जज्बा ऐसा था कि आज जयपुर रंगमंच रो रहा है। मुम्बई मेरी जान और सलाम बॉम्बे कहने वाले और हर रंगकर्मी के दिलों में राज करने वाले एक्टर इरफान खान ( Irrfan Khan latest news ) हमेशा—हमेशा के लिए ये कारवां छोड़ कर अंनत में चले गए। और छोड़ गए प्रेम, आवाज और मोटिवेशनल बातों का खजाना, जिसे बुधवार को जयपुर का रंगमंच ( Jaipur Theater ) आंसूओं के साथ बयां करता रहा। पत्रिका ने जब शहर के रंगकर्मियों से इरफान के साथ बिताए पलों को साझा करने के लिए बात की तो, मंच पर निरंतर बोलने वाले रंगकर्मियों की जुबां से शब्द ही नहीं निकल पाए।

सार्थक वर्कशॉप में 3 बार आए
जयपुर के जवाहर कला केंद्र ( jawahar kala kendra ) में वरिष्ठ नाट्य निर्देशक साबिर खान के निर्देशन में हर साल सार्थक थियेटर वर्कशॉप होती है। साबिर खान बताते है कि इरफान वर्ष 2006, वर्ष 2008 और वर्ष 2012 में वर्कशॉप में आए। वर्कशॉप के मोटिवेशनल सेशन में वे युवा रंगकर्मियों को थियेटर और सिनेमा के संबंधों के बारे में बताते। वे कहते कि जो भी करें, पढ़ना लिखना नहीं छोड़े। जब भी वर्कशॉप में आए कभी लगा ही नहीं कि बॉलीवुड का बड़ा चेहरा सामने हो। हमेशा जयपुर के रंगकर्मी के रूप में आते थे।

हर कलाकार में जिंदा है इरफान सर

अजय देवगन ( Ajay Devgan ) के साथ फिल्म रेड में मुख्य भूमिका निभाने वाले एक्टर अमित बीमरोठ ( Amit Bimrot ) ने कहा कि हर कोई रो रहा हूं। इरफान हर कलाकार में जिंदा है। इरफान मरते नहीं, हमेशा जिंदा रहते है। उनका अभिनय ही ऐसा है कि वे अमर हो गए। मैं तो कभी थियेटर ही नहीं करना चाहता था, लेकिन इरफान सर से प्रभावित हुआ। उनसे जयपुर में वर्कशॉप के अलावा दिल्ली में हुए भारंगम फेस्टिवल ( Bharat Rang Mahotsav ) के दौरान और एफटीआईआई ( FTII ) में पढाई करने के दौरान मिला।

विश्वास नहीं होता, करना भी नहीं चाहता

एक्टर बासु सोनी ( Kedarnath actor Basu soni ) ने बताया कि वर्ष 2006 में थियेटर ज्वाइन किया। उसी साल इरफान सर भी आए। पहली बार में ही मुझे उनके सामने परफॉर्म करने का मौका मिला। उन्होंने कोई गलती बताए बिना कहा कि धीरे—धीरे हो जाएगा। कोशिश नहीं छोड़नी चाहिए। अगली वर्कशॉप के दौरान साबिर सर ( Sabir Khan ) ने मेरी बात कराई, तो मैंने एनएसडी ( NSD ) में प्रवेश नहीं होने के बारे में बताया। तो उन्होंने कहा कि अगली बार हो जाएगा। वहीं बात एनएसडी में मेरे साथ ही। एनएसडी में जब प्रवेश के लिए वर्कशॉप हुई तो मैंने पहले ही सबको कह दिया मैं तो इन हूं। इरफान सर ने पॉजिटिव एनर्जी भर दी थी। फिर मुझे प्रवेश भी मिल गया।

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