29 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Voter List Revision: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतिम आंकड़े आने में लगेंगे लगभग 4-6 महीने का समय

परिसीमन पर उठे सवालों के बीच सरकार का जवाब। 309 में से 234 नगर निकायों में तय मापदंडों के अनुसार हुआ परिसीमन। मतदाता सूची और भ्रष्टाचार पर भी सरकार ने दी सफाई।
less than 1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Rajesh Dixit

•

Updated: 12 Mar 2026, 12:04 PM IST

Rajasthan Assembly Monsoon Session When will Congress shadow cabinet be formed

राजस्थान विधानसभा (फाइल फोटो पत्रिका)

Rajasthan Urban Development: जयपुर। राजस्थान में नगर निकायों के परिसीमन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने विधानसभा में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निर्धारित मापदंडों के अनुसार नगर निकायों का उचित परिसीमन सुनिश्चित कर रही है और अधिकांश निकायों में प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी की गई है।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश के कुल 309 नगर निकायों में से 234 में परिसीमन तय मापदंडों के अनुसार किया गया है। शेष निकायों में भी न्यूनतम स्तर पर ही विचलन सामने आया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 10 के तहत राज्य सरकार को सीमांकन और परिसीमन करने का अधिकार प्राप्त है।

उन्होंने यह भी बताया कि परिसीमन को लेकर तीन नगरीय निकायों में चार रिट याचिकाएं दायर की गई थीं। इस मामले में हाल ही में माननीय उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने निर्णय में वार्डों के पुनर्गठन को उचित ठहराते हुए सरकार की प्रक्रिया को सही माना है।

विधानसभा में चर्चा के दौरान मंत्री ने मतदाता सूची को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने का अधिकार राज्य चुनाव आयोग के पास है। चुनाव आयोग ने बताया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतिम आंकड़े आने में लगभग चार से छह महीने का समय लग सकता है। इसलिए वर्तमान में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ही मतदाता सूची तैयार की गई है।

मंत्री ने कहा कि विभाग भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर भी गंभीर है। यदि कोई कार्मिक भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सांसद या विधायक कोष से किसी विकास कार्य के लिए राशि तभी स्वीकृत की जा सकती है जब संबंधित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में उपलब्ध हो।